सालों पहले गड़े बमों में हो रहा विस्फोट,फोर्स आ रही चपेट में
आईईडी ब्लास्ट में 3 जवान घायल
शनिवार की सुबह 11 बजे अरनपुर-जगरगुंंडा सड़क निर्माण कार्य की सुरक्षा में लगे जवान आईईडी ब्लास्ट की चपेट में आ गए। नक्सलियों द्वारा जमीन में गाड़कर लगाए गए प्रेशर रिलीज तकनीक वाली आईईडी पर सब इंस्पेक्टर पी मोहन का पैर पड़ते ही ब्लास्ट हो गई। उनके पास चल रहे सबजीत घोष और राजेंद्र प्रसाद यादव भी इसकी चपेट में आ गए। पी मोहन को सीने, जांघ व दाहिने हाथ में गंभीर चोटें आई है। सबजीत व राजेंद्र को हथेली, घुटने व जांघ में चोट लगी है। तीनों अरनपुर में तैनात सीआरपीएफ 111 वीं बटालियन के जवान हैं। घायलों को तत्काल एंबुलेंस से जिला हास्पिटल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए हेलीकॉप्टर से रायपुर भेजा गया। घटना की जानकारी मिलते ही एसपी कमललोचन कश्यप घटना स्थल के लिए रवाना हुए और इलाके की सर्चिंग तेज करवाई।
अब तक 6 घायल
अरनपुर-जगरगुंडा मार्ग के निर्माण के दौरान अब तक कुल 3 ब्लास्ट हो चुके हैं, जिसमें पहली घटना में 1 और दूसरी घटना में 2 जवान घायल हुए। इस बार हुई वारदात में 3 जवानों के जख्मी होने से कुल घायलों की संख्या 6 हो गई है। अरनपुर-जगरगुंडा मार्ग निर्माण के दौरान फोर्स ने अब तक सतर्कता पूर्वक 36 आईईडी बरामद कर नक्सलियों के मंसूबों को विफल किया है।
पगडंडी पर नक्सलियों ने लगाया था प्रेशर बम
नक्सलियों ने अरनपुर के कोंडापारा से अटामीपारा के बीच पगडंडी पर प्रेशर बम लगाया हुआ था। फोर्स की तीन टुकड़ियों में एक बीचोबीच जांच करती चल रही थी, दो टुकड़ियां दोनों तरफ निश्चित दूरी पर चल रही थीं। अटामीपारा के नजदीक अचानक दाहिनी तरफ सड़क के किनारे काफी दूर तक चल रहे जवानों में से एक का पैर इस आईईडी पर पड़ गया।
दंतेवाड़ा। प्राथमिक उपचार के बाद जवानों को रायपुर भेजा गया।
अरनपुर थाना क्षेत्र का मामला
ऐसे बना रहे हैं बम
नक्सलियों ने अंदरूनी क्षेत्रों में गांव-गांव में युवाओं को बम बनाने,इससे ज्यादा प्रभावी बनाने,विस्फोट की ताकत जांचने समेत अन्य प्रकार की ट्रेनिंग दी है। बारूदी सुंरग के अलावा प्रेशर रिलीज बम काफी संख्या में बनाए जा रहे है। नक्सल ऑपरेश्न से जुड़े पुलिस अफसरों की मानें तो नक्सली स्टील के बर्तन, वायर, नटबोल्ट, कील, अमाेनियम नाइट्रेट व बारूद का प्रयोग कर पांच से 20 किलो वजनी बम बना रहे हैं। इन समानों को गांव तक ले जाना बड़ा आसान है। टिफिन या केटली में नट बोल्ट व अन्य रसायन भरकर प्रेशर रिलीज बम बनाया जा रहा है।
कितने बम गड़े किसी को पता नहीं
करीब-करीब सभी जिलों में जवान पिछले कुछ सालों में सैकड़ों बम ढूंढ निकाले हैं। इन्हें निकालने के बाद भी और कितने बम जमीन में दबे हैं इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। इस तरह के देशी बमों की चपेट में सिर्फ जवान ही नहीं आ रहे हैं बल्कि आम आदमी भी इनकी चपेट में आ रहे हैं। कुछ समय पहले नारायणपुर इलाके में आंगनबाड़ी के बाहर रखे गए बम की चपेट में कुछ बच्चे आ गए थे। इसके अलावा चिंतलनार इलाके का एक ग्रामीण भी बम की चपेट में आ चुका है। बीजापुर इलाके में कुछ मवेशी भी नक्सलियों के बम की चपेट में आ चुके हैं।