बस्तरिया युवाओं को नहीं योजनाओं का लाभ
भूमकाल दिवस बुधवार को सर्वसमाज द्वारा मनाया गया। पूर्व बस्तर रियासत के राजपुरोहित हरीशचंद्र दास पट्टजोशी, सुकमा जमींदार परिवार के सदस्य कुमार जयदेव समेत सर्वसमाज के सदस्यों ने जयकारा लगाते प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नारियल चढ़ाया। वक्ताओं ने कहा कि शासकीय योजनाओं को लाभ बस्तरिया युवाओं को नहीं मिल रहा।
इसके बाद समाज के सदस्य नाचते-गाते रैली की शक्ल में शामिल हो गोलबाजार पहुंचे जहां इमली पेड़ के पास पहुंच शहीद क्रांतिकारियों को श्रद्घांजलि दी गई। इमली के इसी पेड़ पर 1910 में निरीह आदिवासियों को फांसी दी गई थी। टाउन क्लब परिसर में तीन घंटे से अधिक समय तक चली आमसभा में कांग्रेस नेता शांति सलाम के साथ सर्वसमाज के लोगों से बस्तर के हित में काम करने की अपील की। समाज के एनआर खूटे ने कहा कि आदिवासी समाज के उत्थान को लेकर बनाई जा रही योजनाओं का असर हर आदिवासी तक पहुंचे इसको लेकर कोशिश की जानी चाहिए। राज्य शासन की अनदेखी के चलते सैकड़ों बेरोजगारों को इसका परिणाम भुगतना पड़ रहा है।
इस मौके पर राजमाता कृष्ण कुमारी देवी, सहित धुरवा, भतरा, मुरिया, सुंडी, धाकड़, पनारा, कोया, गोंडवाना, राउत, माहरा, हल्बा बैरागी समाज समेत अन्य समाजों के लोग मौजूद थे। गौरतलब है कि जल जंगल और जमीन पर हक के लिए आदिवासियों ने गुंडाधुर के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति की थी जिसमें कई लोग शहीद हुए थे।
उनकी याद में यह दिवस हर साल मनाया जाता है जिसमें आदिवासी समाज के लोग शामिल होते हैं। भूमकाल स्मृति दिवस पर निकलने वाली रैली के मद्देनजर प्रशासन ने पूरे शहर में चाक चौबंद व्यवस्था की थी। शहर के हर चौराहे पर यातायात व्यवस्था बनाए रखने के साथ लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मचारी तैनात किए गए थे। पुलिस ने गुरू गोविंद सिंह चौक पर शहीद गुंडाधुर पार्क के पास विशेष इंतजाम किए थे।
शहीद गुंडाधुर पार्क से निकली रैली में शामिल अादिवासी समाज के नेता व ग्रामीण
जगदलपुर. तीन घंटे तक चली आम सभा में मौजूद सैकड़ों आदिवासी समाज के लोग
मांगों को लेकर कमिश्नर को राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
1910 में भूमकाल आंदोलन में शहादत देने वाले क्रांतिवीर पुरूषों को स्वतंत्रता सेनानी घोषित किया जाए 10 फरवरी को शासकीय अवकाश घोषित हो शासकीय नियुक्तियों पर भर्ती स्थानीय स्तर से की जाए ग्राम पटेल को मानदेय व उचित सम्मान मिले महारानी हास्पिटल में चिकित्सा सुविधा बढ़ाई जाए एनएमडीसी का मुख्यालय बस्तर जाया जाए एनएमडीसी में जो सदस्य रखे जाएं उसमें स्थानीय मूल निवासी हो