आज भी उपेक्षित है गुंडाधुर का ऐतिहासिक स्थल
जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ने का आह्वान
आदिवासी महासभा व सीपीआई ने जिला मुख्यालय में बुधवार को भूमकाल स्मृति दिवस पर रैली निकाली अौर हाईस्कूल मैदान में सभा का आयोजन किया। इस मौके पर वक्ताओं ने भूमकाल आंदोलन के बारे में अपने विचार रखे और आदिवासियों को जल, जंगल व जमीन पर उनका हक दिलाने संघर्ष करने की अपील की।
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष कुंजाम ने कहा कि हरेक पीढ़ी को अपना इतिहास जानना जरूरी है, क्योंकि जो कौम अपना इतिहास भूल जाए, उसका मूल लक्ष्य से भटकाव हो जाता है। 106 साल पहले हुए भूमकाल आंदोलन की वजह को स्पष्ट कर कुंजाम ने कहा कि अंग्रेजों ने रेल लाइन बिछाने के लिए स्लीपर बनाने बस्तर से सागौन और साल के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की योजना बनाई।
इसका विरोध करने वाले स्थानीय निवासी मूल जातियों पर अत्याचार किए, महिलाओं की इज्जत लूटी गई, लगान वसूली के नाम पर लूट खसोट किया गया। इन सब वजहों से मूल निवासी जातियों ने राजशाही और अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का सूत्रपात कर मुरियाराज स्थापित करने का निर्णय लिया। इस गौरवशाली अतीत से नई पीढ़ी को अवगत कराने आदिवासी महासभा की ओर से केवल 10 फरवरी को ही नहीं, बल्कि 18 फरवरी तक लगातार भूमकाल दिवस मनाया जाएगा।
छठवीं अनुसूची, पेसा कानून के लिए करेंगे आंदोलन
उन्होंने कहा कि आदिवासियों को जल, जंगल और जमीन पर उनका हक दिलाने छठवीं अनुसूची लागू करने, पेसा कानून का पालन कराने जैसी मांगों को लेकर लड़ाई लड़ी जाएगी। आयोजन में पूर्व विधायक नंदाराम सोरी, रामा सोड़ी, बोमड़ाराम कवासी, बीएल श्रीवास्तव, भीमसेन मंडावी, विमला कुंजाम, चमनलाल कुंजाम ने भी उपस्थित जनों को संबोधित किया।
भूमकाल दिवस पर हाईस्कूल मैदान में सभा को संबोधित करते मनीष कुंजाम
हीरानार में आम के पेड़ के नीचे बस्तर के स्थानीय लोगों की बैठक में गुंडाधूर ने अंग्रेजी शासनकाल की अत्यधिक लगान वसूली, अत्याचार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंका था। रातोरात विद्रोह की जमीन तैयार हो गई। आंदोलन का संकेत डारा-मिरी (आम की पत्तेदार टहनी और मिर्च) तय किया गया। इसकी अगली सुबह से ही अंग्रेजों और बस्तर के मूल निवासियों के बीच संघर्ष तेज हो गया। विद्रोह के संकेतक डारा-मिरी को एक गांव से दूसरे गांव पहुंचाया जाने लगा, जिस गांव के लोग इसे स्वीकार लेते, उसे भूमकाल में शामिल माना जाने लगा। जिले के गीदम, कुआकोंडा इलाके में विद्रोह की आग फैली।
डारा-मिरी से फैला था विद्रोह