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कृमिनाशक दवा खाने से राज्य में 100 से ज्यादा पड़े बीमार

5 वर्ष पहले
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कृमि मुक्ति दिवस पर प्रदेशभर में स्कूलों में बच्चों को दवा खिलाने के कारण 100 से ज्यादा बच्चे बीमार पड़ गए। अधिकांश इलाकों में छात्र-छात्राओं को दवा खिलाने के कुछ देर बाद उल्टियां होने लगीं, जबकि कई को पेट दर्द की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। राज्य में स्वास्थ्य विभाग ने करीब 21 लाख बच्चों को दवा देने का लक्ष्य रखा था। 80 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया। इस दौरान कृमिनाशक सीरप एल्बेंडाजोल टेबलेट खाने से जांजगीर जिले के तलदेवरी व गदामोर गांव में 15 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। दुर्ग जिले में 5 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बैकुंठपुर के सलवा गांव में के प्राइमरी व मिडिल स्कूल में 12 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें एक की दशा गंभीर है। बस्तर के बकावंड ब्लॉक में चार बच्चे बीमार पड़ गए। वहीं कोंटा के पास ढोंढरा कन्या आश्रम व प्राइमरी स्कूल में दवा खाने के बाद बेचैनी की शिकायत के बाद डेढ़ दर्जन बच्चे अचेत हो गए। शेष|पेज 7



जिसके बाद मौके पर हड़कंप मच गया। 12 बच्चों की तबीयत कुछ देर में ठीक हो गई, जबकि 6 को स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। जबकि बालोद जिले के गुंडरदेही में 14 छात्रों की तबीयत बिगड़ गई। महासमुंद में 35, सरगुजा में 10 और सुकमा में 05 छात्र बीमार हुए हैं। जांजगीर-चांपा कलेक्टर ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि उन्होंने सभी बच्चों को मध्याह्न भोजन के बाद कृमिनाशक टेबलेट देने के निर्देश दिए थे। टेबलेट खाली पेट बच्चों को नहीं दी जाती।



बच्चों की संख्या

स्थान बीमार

जांजगीर 15

दुर्ग 05

बैकुंठपुर 12

बस्तर 04

कोंटा 18

महासमुंद 35

गुंडरदेही 14

खाली पेट दवा लेने से दुष्प्रभाव
राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. अमर ठाकुर ने बताया कि दवा का साइड इफेक्ट तभी होता है जब बच्चे खाली पेट रहते हैं। इसमें सिर दर्द, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत होती है। राज्य में दवा देने के बाद जितने बच्चों की तबीयत बिगड़ी है वे सभी खाली पेट रहे होंगे। फिलहाल सभी बच्चे स्वस्थ हैं।

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