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राशन दुकान चलाने में बस्तर की महिलाएं सबसे आगे

6 वर्ष पहले
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महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के तहत राशन दुकानों के संचालन को लेकर महिला स्वसहायता समूहों की संख्या जिले में लगातार बढ़ रही है।

भास्करन्यूज | जगदलपुर

कुछसमूह इन दुकानों का संचालन कर परिवार की आय बढ़ा रहे हैं तो कई परिवार का भरण पोषण करने के साथ ही खुद पर निर्भर हो रही हैं। गड़बड़ी काे रोकने में कारगर हो रही शासन की इस पहल के चलते समूहों की संख्या बढ़कर 121 हो गई है जो बस्तर संभाग के अन्य जिलों से आगे है।

खाद्य नियंत्रक विश्वनाथ नेताम ने बताया कि शासन से जारी नियमों के तहत जिले में राशन दुकानों के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत, लैंप्स और महिला स्वसहायता समूहों के साथ ही वन सुरक्षा अधिकार समितियों को दी गई है।

बावजूद इसके बस्तर जिले में राशन दुकानों के संचालन में महिला स्वसहायता समूहों की संख्या अन्य एजेंसियों की तुलना में ज्यादा बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि जब भी राशन दुकानों के संचालन को लेकर विज्ञापन जारी किया जाता है तो सबसे अधिक आवेदन महिला स्वसहायता समूहों का ही रहा है। जिसको देखते हुए पंजीयक कार्यालय द्वारा शासन से जारी निर्देश के तहत से इन्हें बड़ी संख्या में स्वीकृति दी जा रही है।

7 लाख परिवारों को मिल रहा राशन

संभागमें सस्ता चावल, शक्कर, नमक चना का वितरण इस समय 1581 राशन दुकानों के जरिए 7 लाख 30 हजार 259 परिवारों को किया जा रहा है। इसमें बस्तर जिले की 371, बीजापुर 171, दंतेवाड़ा 136, कांकेर 403, कोंडागांव 178, नारायणपुर 76 के साथ ही सुकमा की 142 दुकानें शामिल हैं। खाद्य नियंत्रक ने बताया कि बस्तर जिले में करीब 52 हजार हितग्राहियों को राशन 121 महिला स्वसहायता समूहों और डेढ़ लाख हितग्राहियों को वन सुरक्षा समिति, लैंप्स ग्राम पंचायतों के द्वारा किया जा रहा है जो संभाग के अन्य जिलों से काफी अधिक है।

यह स्थिति संभाग में राशन दुकानों के संचालन की

जिलाग्रापं लैंप्स महिला स्वसहायता समूह वन सुरक्षा समिति

बस्तर62 167 121 05

बीजापुर 50 086 033 02

दंतेवाड़ा 86 036 012 00

कांकेर 121 154 115 08

कोंडागांव 35 140 074 21

नारायणपुर 15 048 012 01

सुकमा 60 065 015 02