बस्तर में पर्यटन का सीजन सिमटा
हालात पूछते हैं सैलानी यहां के, बुकिंग नहीं हो रही होटलों में कोई खास। हर साल सिमट रहा है सीजन पर्यटन का। 25 सितंबर से शुरू हो रहा नवरात्र पर्व।
भास्करन्यूज | जगदलपुर
नवरात्रसे लेकर अगले 15 दिन तक आमतौर पर बस्तर में देशी, विदेशी पर्यटकों के घूमने का सिलसिला चलता था। पिछले दो-तीन साल से देखने में रहा है कि यहां पर्यटन का सीजन धीरे-धीरे सिमट रहा है। इस साल स्थिति यह है कि नवरात्र पर्व एक दिन बाद शुरू हो रहा है जबकि होटलों में कोई खास बुकिंग नहीं हुई है।
यहां सबसे ज्यादा सैलानी पश्चिम बंगाल से आते हैं। जिनका यहां पहुंचने के बाद दो से तीन दिन का प्रोग्राम रहता है। अभी इक्का-दुक्का पर्यटकों का आना शुरू हुआ है। माना जा रहा है कि 28, 29 सितंबर से सैलानियों की संख्या बढे़गी। पर्यटन को लेकर नया ट्रेंड यह भी सामने आया है कि पर्यटक होटल संचालकों से यहां के हालात की जानकारी लेते हैं। बस्तर के विभिन्न हिस्सों में होने वाली नक्सली वारदातों का भी टूरिज्म पर खासा असर पहुंचा है।
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष जतिन जायसवाल के मुताबिक शुरूआती तौर पर बुकिंग कमजोर रही, लेकिन नवरात्र के 4-5 दिन बाद काफी संख्या में सैलानी यहां पहुंचेंगे। दूसरी आेर दशहरा के बाद दिसंबर के अंतिम दिनों और नए साल में शुरू के तीन-चार दिन भी सीजन रहता है।
मार्केटिंग भी ठीक नहीं पर्यटन की
{ट्रेड फेयर महज औपचारिक होकर रह गए हैं। इसमें प्रदेश, जिला की भागीदारी तो होती है, लेकिन वहां पर काम करने वालों को बस्तर के पर्यटन की पूरी जानकारी होने के कारण, मार्केटिंग ठीक ढंग से नहीं हो रही है।
{ कोलकाता से आने और यहां से जाने वाली ट्रेन की टाइमिंग ठीक होना भी पर्यटकों को परेशान करता है। इसके लिए सांसद समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्रयास किए जरूर, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल पाई।
{ जगदलपुर में पहुंचने के बाद भी पर्यटकों को चित्रकोट, तीरथगढ़ समेत अन्य स्थलों की पूरी जानकारी देने की व्यवस्था काफी कमजोर है। नतीजा यह है कि इन जगहों तक पहुंचने पर्यटकों को ज्यादा खर्च करना पड़ जाता है।
{ साधन-सुविधाओं के नित नए दावे पर्यटन मंडल द्वारा किए तो जाते हैं लेकिन जमीनी हकीकत काफी अलग है। पिछले दो साल से चित्रकोट जलप्रपात से चंद कदम दूर सैलानियों के लिए 13 टेंट बनवाने में पसीना छूट रहा है।