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मुकेश गुप्ता ने बताया- इसलिए नक्सलियों के टार्गेट में आए थे एसपी चौबे

4 वर्ष पहले
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बिलासपुर | तत्कालीन इंटेलिजेंस चीफ एडीजी मुकेश गुप्ता ने झीरम घाटी हमले की जांच के लिए बनी जस्टिस प्रशांत मिश्रा की एकल सदस्य वाले न्यायिक आयोग में नक्सली गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने बताया कि राजनांदगांव के एसपी रहे विनोद चौबे की भूमिका नक्सलियों के शहरी नेटवर्क को खत्म करने थी। यही कारण है कि वे नक्सलियों के टार्गेट में थे। इसीलिए 12 जुलाई 2009 को उन्हें नक्सलियों ने शहीद कर दिया। पुराने हाईकोर्ट भवन स्थित चेंबर में चल रही आयोग की सुनवाई में वर्तमान ईओडी और एसीबी चीफ का प्रतिपरीक्षण चल रहा है। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव व देवेंद्र प्रताप सिंह के सवालों के जवाब दिये। उनसे नक्सलियों के शहरी नेटवर्क के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि वेमुला कृष्णात रेड्डी को दुर्ग से गिरफ्तार किया गया। जिस पर आंध्र प्रदेश सरकार ने 2 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। दुर्ग के साथ ही रायपुर इलाके में भी नक्सलियों का नेटवर्क था। इसे खत्म किया गया। उनके दुर्ग में पदस्थ रहने के दौरान मानपुर के थाने को नक्सलियों ने लूटा था, लेकिन वहां तैनात जवानों को कोई हानि नहीं पहुंचाई थी। इसके बाद पुलिस कार्रवाई से नक्सलियों की स्ट्रेटजी बदल गई। वे अब पूरे पुलिस बल को अपना दुश्मन मानने लगे हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान बालोद, राजनांदगांव से मानपुर क्षेत्र व कांकेर से पंखाजूर क्षेत्र नक्सली नेटवर्क बढ़ा रहे थे।



साथ ही नक्सली बस्तर से पंखाजुर होते राजनांदगांव के दक्षिण, पश्चिम व उत्तर क्षेत्र होते बालाघाट तक रेड कारीडोर बनाने की तैयारी में थे। उन्होंने बताया कि 1998 से पहले वे दुर्ग से उज्जैन चले गए और वहां से सितंबर में बस्तर के बांसूर पीटीएस में एसपी बनकर लौटे जो आईपीएस के लिए नहीं था। वहां उनके साथ तत्कालीन महानिदेशक एससी त्रिपाठी व उनके परिजनों से दुर्व्यवहार करने से उनके साथ कड़ाई से निपटा गया जिसके कारण उन्हें महानिदेशक ने बांसूर भेजा। इसके बाद राज्य का बंटवारा हुआ और

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