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परचनपाल से बारसूर तक जुड़ेगी 220 केवीए की लाइन, 3 जिलों की 2 लाख आबादी को फायदा

4 वर्ष पहले
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रायपुर के रायता में स्थित 400 केवीए के पावर स्टेशन से सवा 300 किमी लंबी बिजली की लाइन बस्तर संभाग मुख्यालय से 14 किमी दूर परचनपाल तक पिछले महीने पहुंच गई थी। अब वहां से एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट तक 220 केवीए की लाइन का काम भी पूरा हो गया है। अगले कुछ दिनों में इसकी शुरूआत मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह कर देंगे। इस लाइन के डेवलप हो जाने से सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले को भिलाई के अलावा जगदलपुर के पावर सप्लाई हो सकेगी। इससे 2 लाख की आबादी को सीधी रोशनी मिलेगी।

इस बीच एक बड़ा नया काम शुरू हुआ है। परचनपाल से लेकर दंतेवाड़ा जिला के बारसूर तक 90 किमी लंबी एक नई बिजली की लाइन बिछाई जा रही है। यह लाइन 220 केवीए की है।

इसे बारसूर के पावर स्टेशन से जोड़ दिया जाएगा। जैसे ही यह लाइन बारसूर से जुड़ जाएगी तो दक्षिण-पश्चिम बस्तर के सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों में बिजली सप्लाई के दो अलग अलग काफी बड़े सोर्स तैयार हो जाएंगे। अभी तक स्थिति यह है कि उन तीनों जिलों में पावर सप्लाई करने का एकमात्र सोर्स भिलाई से बारसूर तक आने वाली 220 केवीए की लाइन ही है। अब नई लाइन से एक बड़ा विकल्प बस्तर के संवेदनशील इलाकों में उपलब्ध हो जाएगा।

भिलाई की इकलौती लाइन पर निर्भर थी दंतेवाड़ा,सुकमा, बीजापुर जिलों की लाइट

बारसूर लाइन में कोई बाधा आने से भी सुकमा,दंतेवाड़ा,बीजापुर को मिलेगी सप्लाई
सालों बस्तर में एक ही सोर्स था लाइट का
भिलाई से 400 केवीए के पावर स्टेशन से आने वाली 220 केवीए की बड़ी लाइन बरसों तक बस्तर में पावर सप्लाई का एक ही सोर्स था। वहां से लाइट को स्टेप डाउन करके 132 केवीए में बस्तर जिले में बास्तानार के रास्ते से जगदलपुर आता था। गीदम रोड पर स्थित सब स्टेशन में यह लाइन आज तक जुडी हुई है। यहां से इसे कोंडागांव तक आगे बढ़ाया गया था। इसमें दिक्कत यह रहती है कि जितनी लाइन की लंबाई ज्यादा होती है उतनी उसमें मेंटेन करने में परेशानी होती है।

जैपुर से मिलती थी लोगों को बिजली
4 दशक पहले तक जगदलपुर को पड़ोसी राज्य ओडिशा के जैपुर से बिजली की सप्लाई होती थी। वहां से 33 केवीए में सप्लाई लाइन नगरनार के रास्ते यहां पहुंचती थी। 37 साल पहले 1980 में दंतेवाड़ा के बारसूर में बने 220 केवीए के पावर स्टेशन को भिलाई से आने वाली लाइन से कनेक्ट किया गया था। उस समय काफी दिनों तक पहले इस लाइन में 132 केवीए को चार्ज किया गया था। बाद में जैसे ही लोड की खपत बढ़ी तो उसे 220 केवीए में चार्ज कर दिया गया था।

जगदलपुर से बारसूर जाने वाली लाइन का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नक्सली हमले समेत किसी अन्य कारण से भी यदि बारसूर लाइन फेल होती है तो भी दक्षिण-पश्चिम बस्तर के तीनों जिलों में लाइट की दिक्कत नहीं होगी। नक्सली वारदातों में 2 बार और तकनीकी कारणों से पहले 3 बार बिजली सप्लाई प्रभावित हो चुकी है। साथ ही लोगों को उस समय बेहतर सप्लाई मिलती है जब लाइन लेंथ कम रहती है। विद्युत वितरण कंपनी के डिवीजनल इंजीनियर पीएन सिंह के मुताबिक परचनपाल से बारसूर तक 220 केवीए की लाइन का काम शुरू हो चुका है। इसके पूरा होने से बस्तर के एक काफी बड़े इलाके में दो अलग अलग विकल्प तैयार हो जाएंगे। इसका सीधा फायदा लोगों को होना है।

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