- Hindi News
- जिला अस्पताल में आधुनिक संसाधनों की भी कमी, ज्यादातर केस रैफर
जिला अस्पताल में आधुनिक संसाधनों की भी कमी, ज्यादातर केस रैफर
विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं, इलाज के लिए भटक रहे मरीज
सौबिस्तर जिला अस्पताल में डॉक्टरों स्टाफ की कमी के कारण मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। यहां पर आने वाले गंभीर मरीजों को प्राथमिक इलाज के बाद अन्यत्र रेफर कर दिया जाता है। अच्छे इलाज की उम्मीद में दूर-दूर के गांवों के मरीज जिला अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन उन्हें जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर, आवश्यक संसाधन सुविधा नहीं होने के कारण निराश होना पड़ता है।
जिला अस्पताल के सीएमएचओ डॉ. एनके यदु ने बताया कि सौ बिस्तर अस्पताल में सिर्फ 60 बिस्तरों की सुविधा है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों के 12 पद स्वीकृत हैं। लेकिन वर्तमान में सिर्फ तीन डॉक्टर ही पदस्थ हैं और 9 पद रिक्त हैं। यहां पर पैथोलॉजिस्ट डॉ. एसके शर्मा, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश जोशी और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एमएम देवधर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. यदु ने बताया कि जिला अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के 15 पद स्वीकृत हैं। जिसमें 11 पदस्थ हैं, लेकिन दो मेडिकल ऑफिसर एसके ध्रुव अनीता तिवारी लंबे समय से ड्यूटी पर नहीं रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्टॉफ नर्स के 18 पद स्वीकृत हैं, जिसमें 2 पद रिक्त हैं। इसी तरह तृतीय वर्ग कर्मचारी के 40 पद स्वीकृत हैं जिसमें 14 पद रिक्त हैं। वहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 29 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 21 पद रिक्त हैं। इस तरह जिला अस्पताल में विभिन्न पदों पर कुल 98 पद स्वीकृत हैं, जिसमें सिर्फ 49 कर्मचारी ही पदस्थ हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों स्टाफ की भर्ती के लिए अफसरों शासन को लिखा पत्र
स्टाफकी कमी होने के बाद भी बेहतर काम करने का प्रयास किया जा रहा है। क्षेत्र में सघन दौरा करके टीकाकरण में प्रदेश में बेमेतरा को पहला स्थान दिलाया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों स्टाफ की भर्ती के लिए उच्च अधिकारियों शासन को पत्र लिखा गया है। उन्होंने जल्द ही व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है। ‘‘ डॉ.एनके यदु, सीएमएचओ,जिला अस्पताल बेमेतरा
दो कमरे में संचालित हो रहा पोषण पुनर्वास केंद्र, अलग वार्ड की व्यवस्था नहीं
पोषणपुनर्वास केंद्र प्रभारी डॉ. एमएम देवधर ने बताया कि जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र सिर्फ दो कमरे में ही संचालित किया जा रहा है। यहां पर अलग से वार्ड नहीं है और ही शौचालय की व्यवस्था है। इससे यहां भर्ती होने वाले बच्चों की देखरेख में परेशानी होती ह