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गांवों में मजदूर नहीं मिलने से धान की कटाई और मिंजाई प्रभावित

7 वर्ष पहले
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धानकी खेती का बाहुल्य क्षेत्र कहे जाने वाले बेमेतरा जिले के पास खेत तो है लेकिन उसमें काम करने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। जिले के ज्यादातर गांवों में पलायन और औद्योगिकीकरण के कारण खेतीहर मजदूर अब खेती के बजाए दूसरे कामों में लग गए हैं।

इससे खेती पर संकट दिन दिन गहराता जा रहा है। जिला मुख्यालय से लगे गांव चारभाठा, झाल, धनगांव, कारेसरा, कुसमी, मोहभठ्ठा, तेलईकुड़ा आदि गांवों के मजदूर खेती के बदले जिला मुख्यालय आकर अन्य काम करने लगे हैं। यह समस्या अब विकराल रूप धारण कर कर रही है। सैकड़ों गांव इस समस्या से ग्रस्त हो गए हैं। जिले के ज्यादातर किसान मजदूर नहीं मिलने का रोना रो रहा है। कई गांवों में हाल ये है कि आसपास के गांवों से मजदूर लाकर ट्रैक्टर से ढोना पड़ रहा है। मजदूरों के कमी कारण ही अब किसान कटाई मिसाई के लिए हरियाणा से हार्वेस्टर मंगा रहे हैं। वही कुछ किसान अब रीपर के मदद से कटाई करवा रहे हैं। इस संबंध में मजदूरों का कहना है कि किसान हमें दिनभर मजदूरी करने पर 60 से 70 रुपए देता है। जबकि उद्योगों में उतना ही काम करने पर हमें 150 से 200 रुपए मिल जाते हैं। हम कम मजदूरी में क्यों काम करें। मजदूरो का कहना है किसानों के यहां काम करके हमें एक-डेढ़ माह मे मजदूरी मिल पाती है और उद्योग शहरों में काम करने पर हमें तुरंत भुगतान मिल जाता है।