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सत्यापन के आधार पर वेतन कम करने का विरोध शिक्षाकर्मी जाएंगे हाईकोर्ट

7 वर्ष पहले
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धमधाऔर बेरला विकासखंड के छठे वेतनमान पाने वाले एक हजार शिक्षाकर्मियों को कोष लेखा परीक्षण कार्यालय राजनांदगांव से झटका मिला है। कार्यालय ने वेतनमान के सत्यापन के आधार पर वेतन कम करने का आदेश दिया है। इसका शिक्षक पंचायत संघर्ष समिति ने विरोध किया है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने पूरे मामले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। उनके अनुसार राज्य शासन से बिना गाइड लाइन लिए ही त्रुटिपूर्ण सत्यापन के आधार पर यह आदेश दिया है। इधर धमधा विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने दिसम्बर पेड जनवरी के वेतन को रिवर्स करने की तैयारी कर ली है। जिससे शिक्षाकर्मी आक्रोशित हैं।

उन्होंने बताया कि पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने 17 मई 2013 को जारी आदेश में ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में 8 साल की सेवा अवधि पूर्ण कर चुके सभी शिक्षक पंचायत संवर्ग के कर्मचारियों से शासकीय शिक्षकों के समतुल्य वेतन और भत्तों की पात्रता होने की बात कही थी। जिसमें छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण 2009 नियम के अनुसार विद्यमान मूल वेतन मौजूदा वेतनमान को 1.86 से गुणा करने के बाद छठे वेतनमान का फिक्सेशन करने और वेतन बैंड के आधार पर ग्रेड-पे का निर्धारण कर छठे वेतनमान का भुगतान करने की बात कही थी। अंतिम मौजूदा वेतनमान को समयमान वेतनमान स्वीकार कर वेतन का फिक्सेशन किया गया था। श्री दुबे ने बताया कि त्रुटिपूर्ण सत्यापन के कारण प्रत्येक वर्ग के शिक्षाकर्मियों को 3 से 6 हजार रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ेगा। सर्वाधिक नुकसान वर्ग-03 के शिक्षाकर्मियों को होगा। जबकि सत्यापन के लिए राज्य शासन से कोई गाइड लाइन जारी नहीं की गई है।