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रावण महापंडित इसलिए पहले पूजा, फिर वध

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | भानुप्रतापपुर

ग्रामचिचगांव में दशहरा विधिविधान के साथ श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। गांव में रामायण प्रसंग होता है जिसमें गांव के साथ आसपास के ग्रामीण शोभायात्रा निकाल गांव से कुछ दूरी पर शीतला मंदिर पहुंचते हैं। पास में रावण प्रतिमा स्थापित है वहां पहुंचकर पूजा अर्चना भी करते हैं।

चिचगांव में हर साल दशहरा धूमधाम से मनाते है जिसकी तैयारी एक महीने पहले से शुरू कर दी जाती है। ग्रामीण विष्णु चक्रधारी, विनोद उसारे, नारद दरपट्टी ने बताया कि हर साल दशहरा में रामायण के विभिन्न कांडों का मंचन किया जाता है। रावण की भूमिका गांव के ब्रम्हा चक्रधारी, राम की भूमिका पुनेश उयके, लक्ष्मण की भूमिका नुपेंद्र यादव निभाते हैं। हरेश चक्रधारी, शशि उयके, सुमन केला ने बताया कि यहां रामलीला का मंचन पिछले लंबे समय से लगातार होता आया है। हर साल दशहरा पर कार्यक्रम आयोजित करते है इसमें लगभग 3 दर्जन कलाकार होते हैं।

इसके लिए अलग अलग भूमिका के लिए जिम्मेदारी दी जाती है। कार्यक्रम के पहले कई दिनों तक रिहर्सल किया जाता है। दशहरा पर्व के पहले चार पांच दिन तक गांव में हर रोज रात्रि में रामलीला का आयोजन होता है। कार्यक्रम देखने पूरे गांव के अलावा आसपास के गांव रानवाही, दाबकट्टा, कोर्रामपारा, मरदेल, कुल्हाड़कट्टा सहित कई गांव के लोग पहुंचते हैं। श्यामलाल दरपट्टी, विष्णु चक्रधारी ने बताया दशहरा कार्यक्रम देखने गांव में सगा संबंधी भी पहुंचते हैं और कार्यक्रम का आनंद उठाते हैं।

आधुनिकता हो रही है हावी

विष्णुचक्रधारी, विनोद उसारे, सुमन केला ने बताया कि पहले रामलीला के लिए कलाकारों का साज सज्जा स्व निर्मित होता था और मुखौटा आदि खुद बनाते थे पर वर्तमान में साज सज्जा का समान बाजार में मिल जाता है और भव्यता आती है।

पूजा का ये है तर्क

ग्रामीणोंका कहना है रावण महा पंडित था और जप तप कर सिद्धी प्राप्त कर चुका था तथा वह बड़ा ज्ञानी था। इसी को प्रेरणा मानकर रामलीला समाप्त होने पर पूरे गांव के लोग शीतला मंदिर के पास स्थित रावण की प्रतिमा का पूजन विधिविधान के साथ करते हैं। इसके बाद रामलीला की अंतिम कड़ी राम रावण युद्ध होता है जिसमें रावण का वध होता है फिर लोग रावण का प्रतीक पुतला बन कर दहन भी करते हैं।

भानुप्रतापपुर। चिचगांव में होती है रावण की पूजा।