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दूसरी किस्त नहीं मिलने से पूरेे नहीं हो पाए मकान

7 वर्ष पहले
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कांकेर | वनअधिकार पट्टा प्राप्त हितग्राहियों को इंदिरा आवास के दूसरी किश्त की राशि अब तक नहीं मिल पाई है। वन अधिकार जिन्हें मिला है उन्हें इंदिरा आवास के तहत मकान बनाने 75 हजार रुपए देने का प्रावधान है। शासन ने ऐसे ग्रामीणों को मकान बनाने पहली किश्त तो दे दी जिससे उन्होंने मकान बनवाना शुरू कर दिया लेकिन दूसरी किश्त नहीं मिल पाने से उनके मकान पुरे नहीं हो पाए। इनमें से कई अधूरे पड़े मकान बरसात में धराशायी हो गए। दूसरी किश्त के लिए ग्रामीण जनपद पंचायत जिला पंचायत के चक्कर काट रहे हैं लेकिन वहां से उन्हें सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिल रहा है।

वन अधिकार पट्टा प्राप्त हितग्राहियों को सत्र 2013-14 के इंदिरा आवास की पूरी राशि शेषपेज 16 पर





अभीतक नहीं मिल पाई है। जिनको वन अधिकार का पट्टा मिला है और गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करत हैं ऐसे पात्रता रखने वाले परिवारों को इंदिरा आवास योजना के तहत मकान बनाने पैसे देने का प्रावधान है। सत्र 2013-14 में पहली किश्त के रूप में 37500 रुपए मिले लेकिन दूसरी किश्त की राशि 16 महीने बीतने के बाद भी नहीं मिल पाई है। जिले में वन अधिकार पट्टा के तहत इंदिरा आवास के तहत 5502 ग्रामीण हैं जिसमे सबसे अधिक कोयलीबेड़ा में 1102, भानुप्रतापपुर में 1030, नरहरपुर में 941, अंतागढ़ में 915, दुर्गकोंदल में 825, कांकेर में 431 चारामा में 258 हितग्राही हैं।

हितग्राहियोंको हो रही परेशानी : वनअधिकार पट्टा के तहत दूसरी किश्त की राशि जारी नहीं करने से किसानों को काफी परेशानी हो रही है। पूरी राशि नहीं मिलने के कारण हितग्राहियों के मकान अधूरे पड़े हैं। कई के मकान तो अधूरे होने के कारण बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त होकर गिर भी चुके हैं। कुछ लोगों ने तो इंदिरा आवास के तहत मकान उधारी लेकर बनाया लेकिन दूसरी किश्त नहीं मिलने से कर्जदार हो गए हैं। मालगांव के मोतीराम मंडावी ने कहा दूसरी किश्त की राशि नहीं मिली जिसके चलते वे अपना मकान पुरा नहीं करा पाए और बारिश में उनका अधूरा पड़ा मकान टूट गया। धनेशराम नेताम ने कहा पूरी राशि नहीं मिलने के कारण मकान निर्माण अधूरा है। ईश्वर नेताम ने कहा उन्होंने अन्य लोगो से पैसा उधारी लेकर मकान पुरा करवाया लेकिन दूसरी किश्त नहीं मिलने से अब परेशानी हो रही है।

कांकेर. इंदिरा आवास मकान बनाने दूसरी किश्त नहीं मिलने से अधूरे पड़े मकान ह