अमर प्रेम... पत्नी की प्रतिमा बनवाई, रोज करते हैं पूजा
भास्कर न्यूज | भानुप्रतापपुर
वेलेंटाइन डे, मोहब्बत करने वालों का पर्व। 14 फरवरी का एक दिन जो प्रेम दिवस के तौर पर पूरी दुनिया में मनाया जाता है।
मोहब्बत मगर एक दिन मनाया जाने वाला त्योहार नहीं है। यह बात सीखी जा सकती है भीरागांव के स्वदेश रंजन गुहा से। 55 साल पहले उन्होंने प्रेम विवाह किया था। वह भी घरवालों की मर्जी के खिलाफ बकायदा घर से भागकर।
शादी के बाद हर कदम पर प|ी का साथ निभाया। प|ी की मौत के बाद भी कुछ नहीं बदला। बल्कि उन्होंने प|ी के प्रति अपने प्रेम को जाहिर करने के लिए गांव के चौक पर उसकी प्रतिमा बनवाई है, जिसकी वे हर दिन पूजा-अर्चना करते हैं। भीरागांव में रहने वाले स्वदेश रंजन गुहा अब रिटायर हो चुके हैं। स्वदेश मूलत: कोलकाता के रहने वाले हैं। 1959 में वे डीएनके प्रोजेक्ट में काम करवाने के लिए यहां आए थे।
प्रोजेक्ट के तहत सड़क बनवाने समेत दूसरे काम की जिम्मेदारी उन पर थी। प्रोजेक्ट में जुटे मजदूरों के खाने-पीने का इंतजाम भी उन्हें ही करना होता था। वे मजदूरों के लिए चावल की व्यवस्था करने गांव के ही मालगुजार भीरा मांझी के घर आना-जाना किया करते थे।
यहीं उनकी मुलाकात भीरा मांझी की बहन फुलबत्ती मांझी से हुई थी। स्वदेश अक्सर मांझी के घर पहुंचते थे। फुलबत्ती से मुलाकातों का सिलसिला भी बढ़ता गया, जो जल्द ही मोहब्बत में बदल गया। प्रेम परवान चढ़ा, तो शादी करना तय हुआ।
याद में बनाई प्रतिमा
मई 2009 में फुलबत्ती की बीमारी के चलते मौत हो गई। दो ही सदस्य थे। कोई संतान नहीं थी। अकेेलेपन के कारण स्वदेश काफी दुखी रहता था। आखिरकार स्वदेश ने प|ी की याद को हमेशा के लिए जिंदा रखने का फैसला लेते हुए प्रतिमा बनाने का फैसला लिया। इसके बाद अगस्त 2009 में गांव के चौक पर प|ी की प्रतिमा बनवाई।
कांकेर कोर्ट में की शादी
आखिरकार घरवालों के खिलाफ जाकर शादी करने पर दोनों राजी हुए। 1961 में दोनों घर से भागे और कांकेर में कोर्ट मैरीज की। इसके बाद एक साथ रहने लगे। स्वदेश के अनुसार प्रेम विवाह करने के बाद कई तरह के विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन वे दोनों कभी नहीं घबराए। हर हाल में साथ रहने का एक-दूसरे काे वादा दिया।
भानुप्रतापपुर. प|ी के याद में बनाया पति ने प्रतिमा।