गुज्जे देवी के आंगन में झूमे देवी-देवता
विधायक देवती कर्मा के गृहग्राम फरसपाल में मंगलवार को वार्षिक करसाड़ मेले का आयोजन हुआ।
भास्करन्यूज| दंतेवाड़ा
इलाकेकी देवी गुज्जे डोकरी चिखलादेई माता मंदिर प्रांगण में सिरहों पर सवार देवी-देवता झूमते नजर आए। लोग हाथों में ढोल लिए थिरकते रहे। दूर-दराज के गांवों से भी ग्रामीण देव ढोल लेकर पहुंचे थे। बीजापुर जिले के परलगट्टा, नम्मी गलगम जैसे दूर-दराज के गांवों से भी देवी-देवता आमंत्रण पर पहुंचे थे। जिले के बेंगपाल, गमपुर, मड़कामीरास, टिकनपाल, दुगोली, धुरली, नेरली, कलेरतोंग, आलनार, मेटापाल, कोंडापाल से भी देवी-देवताओं के प्रतीक चिह्न लेकर ग्रामीण मेला स्थल पर अलग-अलग समूहों में ढोल नर्तक परिक्रमा करते रहे। परंपरा का निर्वहन करने पुरूषों के साथ महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं।
देवी स्थल के नजदीक अस्थाई दुकानें सजी थीं, जिनमें मनिहारी सामान, खिलौने गुब्बारे, फल, मिठाई, नाश्ते की दुकाने भी शामिल थीं। दिन भर परिक्रमा के बाद रात में भी ढोल नृत्य के लिए आयोजन समिति ने बिजली-पेयजल के इंतजाम किए थे।
दंतेवाड़ा. देवी स्थल के नजदीक अस्थाई दुकानें सजी हुई थीं, जहां आस-पास के ग्रामीणों ने फल, मिठाई, अन्य जरूरतों की सामान खरीदी करते दिखाई दिए।
12 गोत्र की देवी हैं गुज्जे
पुजारीअर्जुन मांझी के मुताबिक स्थानीय आदिवासी परंपरा के मुताबिक 12 मंडा यानि मड़काम, इच्छाम, कड़ियाम, कलमुम, पुनेम, कंडाम, ताती, भोगाम, तेलाम, कड़ती, मिड़ियाम, रेंगो एक ही गोत्र समूह को माने जाते हैं। फरसपाल में विराजी गुज्जे डोकरी सबकी अधिष्ठात्री देवी है। मेला से पहले पखवाड़े भर तक रोजाना रात में ढोल बजाकर देवी जागरण किया जाता है। घोटपाल में भरने वाले मेले के ठीक अगले मंगलवार को फरसपाल में मेला भरता है।