करंट से कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
शिक्षाको बढ़ावा देने और बच्चो की सुरक्षा में सरकार करोड़ों रूपए खर्च कर रही है। इसके बावजूद अन्दरूनी इलाकों के कई आश्रम एेसे हैं जहां बच्चे असुरक्षित तो हैं साथ ही उन्हें खान-पान भी सही रूप से नही मिलता है। जिले के रेडडी के बालक आश्रम में लापरवाही का कुछ ऐसा आलम देखा गया जहां बच्चे बिजली के मेन लाईन पर अपने कपड़े सुखाए हुए थे। इतना ही नहीं यहां बिजली के तार जालों की तरह लगाए गए हैं।
बीजापुर जिलें के रेडडी आश्रम की व्यवस्था बदहाल हो गई है। जिला मुख्यालय से कोई भी अफसर इनकी सुध लेने आज तक नहीं पहंुचा है। यहां 50 बच्चे दर्ज हैं लेकिन अव्यवस्था के चलते अधिकांश अपने घर पर ही रहते हैं। यहां रहने वाले गिने-चुने छात्रों में भी कई छात्र बीमार ही रहते हैं। छात्रों ने आश्रम अधीक्षक पर बच्चो की देख भाल नही करने के आरोप भी लगाए हैं।
स्टाफकी कमी : बालकआश्रम रेडडी में तीन शिक्षक के अलावा दो चपरासी की नियुक्ति की गई है। कम स्टाफ के चलते बच्चों की बेहतर शिक्षा पर प्रभाव पड़ रहा है। अधीक्षक मीटिंग के नाम पर अधिकतर जिला मुख्यालय में रहते हैं। दो शिक्षक ही यहां अध्यापन का कार्य करते हैं।
सहायक आयुक्त बीके राजपूत ने बताया रेड्डी आश्रम में बिजली की टेम्परेरी व्यवस्था की गई है। इसे दूरुस्त करने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। अधीक्षकों को नियमित रूप से मौजूद रह कर भोजन व्यवस्था में सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं।
कभी भी हो सकती है दुर्घटना
आश्रममें बिजली के तार टेम्परेरी तौर पर लगाए गए हैं। इस आश्रम में बिजली के मेन लाइन पर बच्चों के कपड़े सूखते रहते हैं। कमरों में मकड़ी की जाल की तरह तार लटके हुए हैं। जिससे कभी भी बच्चों के साथ बड़ी दुर्घटना होने की संभावना बन सकती है।
बच्चों को नही मिलता शुद्ध भोजन
रेडडीके इस आश्रम में बच्चों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता है। आश्रम में सब्जी के नाम पर खराब सब्जी कीड़ा लगा चावल खिलाया जा रहा है। बच्चों को असमय भोजन कराया जाता है। आश्रम में कुछ बच्चे अब भी बीमार हैं जिन्हें इलाज नहीं मिल पाया है।