गांव-गांव से लाए जा रहे मरीज
^मलेरिया पीड़ितों को बजाए सीधे इलाज के लिए लाने के उन्हें झाड़-फूंक करने वालों के पास ले जाने से देर हो जाती है जो मौत में बदल जाती है।”
़डॉ.भंवरलालशर्मा, जिलाहास्पिटल, बीजापुर
मुसीबतों की फेहरिस्त
}1800रुपए की दवाएं हर सुबह बाजार से एक मुश्त करनी पड़ती है स्मार्ट कार्ड होने से
}30 सीटर क्षमता वाले हास्पिटल में रोजाना 400 मरीजों की व्यवस्था।
}16 मेडिकल आफिस 8 स्पेश्यलिस्ट की जगह सिर्फ 4 डाक्टर्स ही।
}2 लैब टेक्निशियन और 1 सहायक को रोज निपटानी पड़ती है 250 से ज्यादा स्लाइड।
}ब्लड सेंपल की रिपोर्ट समय पर मिलने इलाज में देरी, नतीजा मौत तक।
एनटी मलेरिया दवा-इंजेक्शनों की कमी
भास्कर न्यूज |बीजापुर
जिलाहास्पिटल की तमाम व्यवस्था इन दिनों अस्त-व्यस्त हो गई है। मरीज बेड पर कम बरामदे और जमीन पर लेटे हुए ज्यादा दिखाई दे रहे हैं।
हास्पिटल के पर्ची काटने वालों के मुताबिक 400 मरीज रोज ओपीडी में दस्तक दे रहे हैं। इनमंे 250 ग्रामीणों के मलेरिया होने के दायरे में रख कर जांच की जा रही है।
जांच स्लाइड से मिले नतीजों में 50 को पक्की तौर पर मलेरिया पीड़ित बताया गया है। हास्पिटल स्टाफ के मुताबिक बीते डेढ़ माह में मौसम के रोज बदलते रुख का नतीजा है कि मलेरिया के अलावा पीलिया पीड़ित भी बढ़े है। इलाके की ग्रामीण आबादी को स्वच्छता के लिए खास सजग किया जा रहा है।
सांसेउखड़ रहीं थीं
तामलापल्लीकी शारदा सेंड्रा और ईंटपाल की मालती नामक महिलाओं की मौत हास्पिटल में एक सप्ताह में हो गई। परिजनों ने इन दोनों को जब हास्पिटल दाखिल करवाया सांसे उखड़ रहीं थीं।। इन दोनों की जांच रिपोर्ट में मलेरिया का खुलासा पूरी तरह नहीं हो पाया पर यही वजह भी यही बताई जा रही है।
मलेरिया पीड़ितों में शिविरों में रह रहे जवानों से लेकर आश्रम छात्रावास, पोटा केबिन के बच्चे से लेकर महिलाएं तक शामिल हैं। मलेरिया से बचाव के बताए गए तौर-तरीके और उपलब्ध संसाधनों की उपयोग सही हो पाना भी इस रोग पीड़ितों को बढ़ा रहा है। मच्छरों से बचाव के लिए दी गई रासायनिक घोल बाली मच्छरदानियों को जाल बनाकर मछली पकड़ी जा रही है। ठहरे गंदे पानी, के निकास की उचित व्यवस्था होने से भी मच्छर पनप रहे हैं।