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नर्स के इस्तीफे के बाद बच्चों को देखने वाला कोई नहीं

5 वर्ष पहले
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करपावंड के एकलव्य आवासीय विद्यालय के बच्चों की परवरिश भगवान भरोसे हो रही है। इस हॉस्टल में 370 से भी ज्यादा बच्चे रहकर पढ़ाई करते हैं पर इनकी स्वास्थ्य की चिंता किसी को नहीं है। इस हास्टल में आपात स्थिति में बच्चों को राहत देने वाले कोई इंतजाम ही नहीं हैं। यहां कुछ समय पहले तक एक स्टाफ नर्स तैनात थी, पर उसने भी कुछ महीने पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से हॉस्टल में ऐसा कोई इंतजाम या डाक्टर नहीं है जो बच्चों की सेहत का ख्याल रख सके।

इसके अलावा एक गंभीर बात यह है कि इस इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर भी कोई बड़ा हास्पिटल या ऐसा सेंटर नहीं है जहां बच्चों को फौरी तौर पर राहत दी जा सके। प्राथमिक उपचार के लिए भी बच्चों को बकावंड लाना पड़ता है। यदि आधी रात किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ती है तो उसे बकावंड तक पहुंचाने के लिए भी कोई साधन हॉस्टल प्रबंधन के पास नहीं है।

यहां बच्चों की सेहत का जिम्मा भगवान भरोसे ही है। इधर हास्टल प्रबंधन यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है कि नर्स की नियुक्ति से लेकर बच्चाें को आपात स्थिति में हास्पिटल पहुंचाने की व्यवस्था आला अधिकारियों को करनी है। ऐसे में वे इस मामले में चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं।

अफसरों को पता है
हॉस्टल में बच्चों के सेहत का ख्याल रखने के लिए एक नर्स की पोस्ट कई दिनों से खाली पड़ी है। इस पद के लिए यहां भर्ती होनी है। उच्च अफसरों को मामले की जानकारी है, यह काम उनके द्वारा ही किया जाना है। चैनिसंग भद्र, हास्टल वार्डन

बीमारी के भय से दर्जनों छात्र छुट्टी पर
एकलव्य विद्यालय के दर्जनों छात्र छुट्टी पर हैं। बताया जा रहा है कि लंबे समय से बीमारियों व अन्य कारणों के चलते करीब 30 से ज्यादा छात्र हास्टल में नहीं आ रहे हैं। इनमें से कुछ छात्र तो दाखिला लेने के कुछ दिनों बाद से ही हॉस्टल नहीं लौटे हैं। इसके अलावा दो दिन पहले बीमार हुए 14 छात्रों में से सिर्फ वे छात्र ही हॉस्टल लौटे हैं जिनके परिजन समय पर हास्पिटल नहीं पहुंच पाए हैं। ज्यादातर बच्चों के परिजन उन्हें अपने साथ बेहतर इलाज के लिए अपने घर ले गए हैं।

उल्टी-दस्त से छात्रा की मौत
बीजापुर| भैरमगढ़ ब्लाॅक के बेदरे में संचालित सौ सीटर कन्या छात्रावास की पांचवी की एक बालिका रजनी मज्जी(11) पिता दोए मज्जी की उल्टी-दस्त से मौत 10 फरवरी को हो गई। बताया गया कि रजनी को 9 फरवरी को उसके चाचा हाॅस्टल से गांव ले गए थे। गांव में जात्रा था। 10 फरवरी को उसकी तबीयत बिगड़ी और उल्टी-दस्त होने लगी। उसे भैरमगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बीआरसी एनके सोरी ने बताया कि बालिका की तबीयत गांव में खराब हुई थी। वहां एएनएम ने उसे दवा दी थी।

50 फीसदी बच्चों में खून की भी कमी
एकलव्य आवासीय विद्यालय में अध्यनरत ज्यादातर बच्चों में खून की कमी होने की आंशका भी जताई रही है। स्थानीय डाक्टर अलग-अलग मौकों पर कह चुके हैं कि यहां के कई बच्चे एनीमिया के शिकार हैं। दो दिनों पहले हास्पिटल में भर्ती हुए विद्यार्थियों का भी हिमोग्लोबीन चेक करवाया गया था। इनमें से भी कुछ में खून की कमी पाई गई है। स्थानीय स्वास्थ्य कर्मचारी दबी जुबान में कहते हैं कि हास्टल के पचास फीसदी से ज्यादा बच्चों में खून की कमी है। इसका कारण सही खान-पान के न होने को बताया जा रहा है।

13 फरवरी को प्रकाशित खबर।

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