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फोर्स की रेकी...
कीसंयुक्त पार्टी गश्त के लिए निकली थी। इस बीच सूचना मिली की मरदापटेल के जंगल में नक्सली छिपे हुए हैं। जवानों ने घेराबंदी कर नक्सली दंपती को पकड़ा। इनमें 26 साल का संजीव हिचामी उर्फ नागेश निवासी बीजापुर थाना के एनचोड़ा मद्देड़ और 25 साल की नवोतीन हिचामी उर्फ संतीला कोयलीबेड़ा के गोंदूल की है। कोयलीबेड़ा थाना प्रभारी खुटेश्वर ने बताया कि संजीव हिचामी हार्डकोर नक्सली है। वह मिलट्री प्लाटून कमांडर है। उस पर शासन की ओर से 8 लाख रुपए का इनाम है। उसकी प|ी नवोतीन हिचामी पर 3 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। इनके खिलाफ कोयलीबेड़ा थाने में दो मामले दर्ज हैं।
ट्रेनोंमें अवैध...
चारनिजी कंपनियां यात्रियों की बर्थ तक खाना पहुंचाने के धंधे में कूद चुकी हैं। कमसुम, ट्रैवलखाना डॉट कॉम, थालीवाला डॉट कॉम और मेराफूडच्वॉइस डॉट कॉम। सभी का दावा है कि रेलवे ने ही इसकी अनुमति उन्हें दी है। लेकिन रेलवे इससे साफ इनकार कर रहा है। ट्रेनों में कमसुम नाम की कंपनी ने सबसे पहले 1 अप्रैल 2013 से ऑनलाइन और फोन कॉल के माध्यम से खाना देने की शुरुआत की। भास्कर ने पड़ताल में पाया है कि कमसुम ने अपनी वेबसाइट पर इंडियन रेलवे टूरिज्म एंड कैटरिंग कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) द्वारा मिले लाइसेंस का हवाला दिया है। आईआरसीटीसी रेलवे की सिस्टर कंसर्न कंपनी है और यही अधिकृत तौर पर स्टेशनों में फूड प्लाजा चलाती है। रेलवे बोर्ड के अफसरों का कहना है कि तो कमसुम और ही दूसरी किसी निजी कंपनी को उसने ट्रेनों में खाना सप्लाई करने की इजाजत दी है। ट्रेन में खाना पहुंचाना पूरी तरह से अनधिकृत है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मुख्यालय की ओर से इसी महीने एक पत्र जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि चलती ट्रेनों में यात्रियों को जो खाना परोसा जा रहा है, उसकी जानकारी रेलवे को नहीं है। इस तरह की कोई योजना रेलवे संचालित ही नहीं कर रहा है। उधर, नाम छापने की शर्त पर पेंट्रीकार के कई ठेकेदारों ने बताया कि रेलवे के पास इसके लिए कोई ठोस नीति नहीं है। ट्रेनों में खाना सप्लाई करने वाली केटरर कंपनियां अपने आप को रेलवे से संबद्ध बताती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि रेलवे के सह पर ही डायल-ए-मील योजना चल रही है।
केटररकंपनियों का यह है दावा
कमसुमडॉटकॉम: हमारी कंपनी रेलवे की ही सहयोगी कंपनी आईआरसीटीसी