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कुष्ठ पीड़ित की मौत को बताया स्वाभाविक

5 वर्ष पहले
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कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति काे इलाज के बाद भी राहत नहीं मिली। उसका घाव और बढ़ने लगा तो उसने खुद अपने बेटे को गांव से बाहर छोड़ने के लिए कहा। गांव के बाहर झोपड़ी बना दी गई। कुछ दिन पहले उसकी मौत हो गई तो उसके बेटे और ग्रामीणों ने उसका मौके पर ही दाह संस्कार किया और छूत की आशंका में उस झोपड़ी को भी आग लगा दी जिसमें बुजुर्ग रहता था।

घटना चंद्रपुर थाना क्षेत्र के ग्राम भैंसामुहान की है। यहां के एक 85 वर्षीय बुजुर्ग को करीब 40 साल पहले कुष्ठ रोग हो गया। उसका इलाज कराने के लिए उसे रायगढ़ में भर्ती किया गया। जहां इलाज से उसका रोग ठीक हो गया था।

जिसके बाद वह करीब 4 साल पहले अपने गांव आकर अपने घर में रहता था। हाल में उसका घाव फिर से बढ़ने लगा था। उसके पैर का घाव इतना बढ़ गया था कि पांव गल गया था उसमें कीड़े पड़ गए थे। सूत्रों के अनुसार बुजुर्ग ने अपनी स्थिति को देखते हुए स्वयं अपने बेटे को कुष्ठ रोग के फैलने की आशंका जताते हुए गांव से बाहर छोड़ने के लिए कहा था। उसका बेटा गांव के बाहर एक झोपड़ी बनाकर रखा था। जहां वह अपने बाप के लिए सुबह शाम खाना लेकर जाता था। 8 फरवरी की सुबह भी उसका बेटा चाय लेकर गया तो वृद्ध की मौत हो चुकी थी। उसके बेटे और ग्रामीणों ने वृद्ध का वहीं पर अंतिम संस्कार कर दिया और वह जिस झोपड़ी में रहता था उसे भी आग लगा दी।

एसडीएम रीता यादव के मुताबिक झोपड़ी समेत दाह संस्कार की बात गलत है। कलेक्टर ओपी चौधरी के आदेश पर गांव व आसपास में कुष्ठ रोगियों की पहचान कराई जा रही है। पीड़ितों को चांपा के सोंठी कुष्ठ आश्रम में भर्ती कराया जाएगा।

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