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एक हाथ गंवाने के बाद भी राम सिंग ने जीवन से नहीं मानी हार

6 वर्ष पहले
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28साल पहले करेंट की चपेट में आने से हाथ गंवा बैठा था रामसिंग राठिया। 50 बसंत पार करने 1 हाथ नहीं होने का दर्द तो है, पर कठिन से कठिन काम को अंजाम देने कभी हिम्मत नहीं हारना। हौसला ऐसा कि जिस काम को दो हाथ से किया जा सकता है उसे अपने एक ही हाथ से इस तरह कर बैठता है कि दोनों हाथ वाले लोग पीछे हो जाएंगे।

यह जज्बा है करतला विकास खंड के ग्राम चांपा निवासी स्व.गिदी सिंग राठिया के पुत्र रामसिंग राठिया में। 23 साल की उम्र (1990) में रामसिंग की शादी उसके पिता ने हंसी खुशी से कराई थी। शादी के बाद अचानक रामसिंग का मानसिक संतुलन बिगड़ गया वह गांव के पास से ही प्रवाहित 11 हजार केवी लाइन के टावर पर चढ़ गया। करेंट के प्रवाह से उसका एक हाथ बुरी तरह झुलस गया। और डॉक्टरों की सलाह पर उसे काटना पड़ा। काफी दिनों तक वह सामान्य स्थिति में नहीं पाया। जब भी अपने हाथ की ओर देखता वह बेचैन हो जाता। पिता भाई किसी तरह उसे सामान्य स्थिति मेें लाने में सफल हुए, इस बीच उससे पिता भाई का साया सिर से उठ गया। भाई के दो बच्चे प|ी का खर्च चलाने की जिम्मेदारी रामसिंग पर गई। एक हाथ नहीं होने से उसे गांव में कोई काम भी नहीं दे रहा था। ऐसे में वह अपनी पुस्तैनी जमीन वह भी टिकरा थी उसी पर श्रम करके परिवार का खर्च चलाने का मन बना लिया। रामसिंग राठिया को साइकिल चलाने का शौक है। एक हाथ से साइकिल चलाने में महारत है। साइकिलिंग करते समय अगर सामान्य व्यक्ति उससे प्रतिस्पर्धा करना चाहे तो वह उसे आगे नहीं निकलने देगा।

उसके साइकिल की गति तेज होने के बाद भी संतुलित नियंत्रण में होती है। वह प्रतिदिन 30 किलोमीटर साइकिल चलाता है। यहां तक की खेतों में काम करने जाने के लिए भी साइकिल का ही उपयोग करता है। मेहनत करने में उसे कोई पराजित कर दे यह उसे मंजूर नहीं। उसने नाबार्ड बाड़ी विकास परियोजना से जुड़ कर अपनी पुस्तैनी टिकरा जमीन को उपजाऊ बनाने की सोची। इसके लिए उसने प्रशिक्षण भी लिया। उसके बाद महज 30 दिन में उसने 4 एकड़ खेत में 220 पौधे लगाने के लिए एक हाथ से फावड़ा चलाकर गड्‌ढे खोद डाले। गड्‌ढे भी ऐसे की सामान्य नहीं। डेढ़ मीटर चौड़ा 3 मीटर गहरा। उसके बाद सभी गड्ढों में आम, काजू नीबू के पौधे रोप डाले। बात यहीं खत्म नहीं हुई। हाड़ तोड़ मेहनत करने के बाद गड्‌ढे की रिंगट्रेस, स्टेकिंग पूरी बाड़ी की फेंसिंग अकेले कर डाला।

हाथियों ने किया नुकसान, फिर भी लगा रहा

बाड़ीविकास परियोजना के माध्यम से खेत में लगे फलों के पौधों से पांच साल बाद लाभ मिलना शुरू होगा, लेकिन अंतरवर्तीय फसल उक्त भूमि से लेते हुए अपने परिवार की गाड़ी अच्छी तरह खींचने वाले रामसिंग को तब दुख हुआ जब उसकी बाड़ी में लगी फसल पौधों को हाथियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। लेकिन वह हिम्मत नहीं हारते हुए पुन: नए पौधे रोपित कर उन्हें जीवित करने में जुटा हुआ है। आज उसके खेतों में आम, काजू नीबू के पौधों के सब्जी की फसल लगी हुई है।

खुदाई के पैसे से किया फेंसिंग

खेतोंमें पौधे लगाने खोदे गए गड्‌ढेे से अनुदान पर मिली राशि से पूरे 4 एकड़ में फेंसिंग के लिए कंटीला तार खरीदा। पौधों की सुरक्षा के लिए पूरी बाड़ी को चारो ओर से कंटीले तारों से घेर दिया है। इससे जंगली जानवरों से फसल को नुकसान होने से भी बचा सकता है। पौधों के साथ खेत में रिक्त पड़ी जमीन पर सीजन के हिसाब से फसल ले रहा है। जिससे उसके परिवार का खर्च चल रहा है।

खेत में काम करता रामसिंग।