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सड़कों पर बढ़ा भारी वाहनों का दबाव

7 वर्ष पहले
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कटघोरा-बिलासपुरचांपा मार्ग पर सड़क दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। दोनों ही मार्गों पर भारी वाहनों का दबाव बढ़ता ही जा रहा है। इसके बाद भी प्रशासन के पास सड़कों की मरम्मत चाैड़ीकरण के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। तेज रफ्तार पर लगाम कसने वाले विभाग भी खामोश हैं।

जिले के दोनों प्रमुख मार्ग जिसकी लंबाई 156 किलोमीटर है। बीओटी के तहत दिया गया है। इसकी अवधि 2017 है। दोनों ही मार्गों के कुछ चिन्हित स्थानों पर हर दूसरे दिन दुर्घटनाएं होती है। मार्ग पर सबसे अिधक कोयला परिवहन का दबाव रहता है। भारी ट्रेलर की चपेट में आकर लोग दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। इन दिनों में चार पहिया वाहनों की संख्या में बढ़ी है। जिनकी रफ्तार भी अिधक होती है। इसे रोकने के लिए प्रयास नहीं किया जा रहा है।

भारीवाहनों की नहीं होती जांच -यातायात पुलिसपरिवहन विभाग वाहनों की जांच करती है। लेकिन अिधकांश समय बाइक छोटे मालवाहक वाहनों की जांच की जाती है। भारी वाहनों की जांच नहीं होती। अिधकांश वाहन अनफिट होते हैं। इसके बाद भी उन्हें फिट का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। कटघोरा-अंबिकापुर मार्ग पर भी ट्रेलर का दबाव रहता है।



जिसके कारण दुर्घटनाएं होती हैं।

संकेतक तक नहीं लगा

मार्गपर मोड़ पुल-पुलिया पर संकेतक तक नहीं लगाया गया है। पीडब्ल्यूडी के अिधकारी इसके लिए ठेकेदार को नोटिस तक देने में सीमित हैं। दिन के समय भी कुछ स्थानों पर दुर्घटनाएं होती हैं, जिसमें सुतर्रा मोड़, चैतमा मोड़, पाली बस स्टैंड, चांपा मार्ग पर सरगबुंदिया, मड़वारानी, फरसवानी के पास सबसे अिधक दुर्घटना होती है। इस पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

कटघोरा-चैतमा मार्ग में मोड़ पुल पर संकेतक नहीं लगने से हो रही दुर्घटनाएं।