पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर रहे लोग

पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर रहे लोग

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सब्जी में तोराई बरबट्टी का होना अनिवार्य माना जाता है।

भास्करन्यूज|दल्लीराजहरा

पितृपक्ष में घर के बाहर दरवाजे पर आटे का चौक पूरकर, उसपर आसन बिछाकर जल भरे कांसे के लोटे को रख पूर्वजों को न्यौता दिया जा रहा है। इस दौरान अलग-अलग दिनों में लोग अपने परिजनों के मृत आत्मा की शांति के लिए मोहल्ले के लोगों को भोजन कराते हैं। सब्जी में तोराई बरबट्टी का होना अनिवार्य माना जाता है। जिसकी वजह से इन दिनों तोराई 100 बरबट्टी 80 रुपए किलो बिक रहे हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान कोई नया कार्य शुरू नहीं किया जाता है और ही आभूषण की खरीदी की जाती है।

गणेश विर्सजन के बाद 9 सितंबर से शुरू पितृ पक्ष 23 सितंबर तक चलेगा। इस पक्ष में पितरों को संतुष्ट करने किया जाने वाला कार्य श्राद्ध कहलाता है। पंडित चांदमल शर्मा ने बताया कि वैदिक परम्परा और हिंदू मान्यताओं के अनुसार पुत्र का पुत्रत्व तभी सार्थक माना जाता है जब वह अपने जीवित माता-पिता की सेवा करे और उनकी मृत्यु के बाद उनकी बरसी पर पितृपक्ष में उनका विधिवत श्राद्ध करे।

अपने पितरों का श्रद्धापूर्वक ध्यान करना और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करना ही श्राद्ध है। पितृपक्ष दिवंगत पूर्वजों की मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करने से पितृ तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं। जिससे पितृदोष दूर होता है। पूर्वजों की मृत्यु तारीख पर ब्राम्हण को निमंत्रण देकर भोजन, वस्त्र एवं दक्षिणा सहित दान, पितृ तर्पण एवं श्राद्ध करना चाहिए। श्राद्ध में एक हाथ से पिंड एवं आहुति दें लेकिन तर्पण में दोनों हाथों से जल देना चाहिए। तर्पण में दक्षिण दिशा मुख करके कुश काले तिल के साथ जल को दोनों हाथों से ऊपर उठाकर पुन: जल में डाल दें। पुन: आकाश की तरफ गिराएं क्योंकि पितरों का निवास आकाश दिशा दक्षिण है। पितृ शांति के लिए श्रीमद भागवत पुराण का पाठ कराना विशेष लाभदायी है।