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श्रीकृष्ण-रूखमणी विवाह में नाचते गाते रहे श्रद्धालु

6 वर्ष पहले
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वार्ड-16कांडे दफाई के गौरी मंदिर में श्रीमद भागवत ज्ञानयज्ञ सप्ताह शुरू हुआ। बुधवार को कांकेर से अाए महाराज तोरण कुरना ने श्री कृष्ण रूखमणी विवाह के बारे में बताया गया। उन्होंने परायणकर्ता जय शर्मा ने पूरे विधि-विधान से मंत्रोच्चारण कर सात फेरे लगाकर विवाह करवाया।

जिस प्रकार कोई अपनी प्यारी बेटी का विवाह करता है ठीक उसी प्रकार भगवान श्री कृष्ण माता रूखमणी का विवाह कराया गया। श्री कृष्ण भगवान के साथ बड़ी संख्या में बाराती आए। आज भगवान की शादी है गाने में श्री कृष्ण भगवान के साथ श्रोता नाचने लगे। पं. तोरण महाराज ने चुलमाटी गीत तेल हल्दी करते समय भांवर, विवाह, मड़ौनी, स्वागत विदाई गीत गाकर सबका मन मोह लिया। उन्होंने हास्य रस एवं करूण रस में बखान कर श्रोताओं को भाव-विभाेर कर दिया। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा की चांदनी रात सबसे उजाले वाली रात होती है पोला, हरियाली, दीपावली- कालरात्रि, सिद्धरात्रि एवं महारात्रि सबसे अंधेरी वाली रात होती है। वहीं उपरात्रि दो नवरात्रि एवं एक शिवरात्रि होती है। उन्होंने उजाले अंधेरे के महत्व को बताया। सुभद्रा बाई, रूखमणी बाई, धनेश्वरी, पवन साहू, पुजारी मिथलेश गोस्वामी, मनराखन, कमल, शगुन, प्रमिला समेत वार्ड 14, 16 17 के लोग मौजूद थे।

श्रीमद् भागवत कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु।