- Hindi News
- दाह संस्कार के लिए लकड़ी नहीं मुक्तिधाम में 5 घंटे पड़े रहे 2 शव
दाह संस्कार के लिए लकड़ी नहीं मुक्तिधाम में 5 घंटे पड़े रहे 2 शव
क्षेत्रके डिपो में दाह संस्कार के लिए जलाऊ लकड़ी की किल्लत है। रविवार को मृतकों के परिजनों को बरसते पानी में लकड़ी के लिए भटकना पड़ा। दाह संस्कार के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। मुक्तिधाम में पांच घंटे बाद शव पड़े रहे। परिजनों ने जैसे-जैसे लकड़ी की व्यवस्था कर दाह संस्कार किया।
वार्ड-20 गांधी चौक निवासी ज्योति मेश्राम (20) के शव को अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजन सुबह 10.30 बजे चिखलाकसा सार्वजनिक मुक्तिधाम पहुंचे। इधर चिखली रोड डेम साइड जलाशय के मुक्तिधाम में वार्ड 10 निवासी किसमत बाई (53) के शव को दाह संस्कार के लिए लाया गया। यह क्षेत्र जगल के बीच है। जहां शेड की व्यवस्था नहीं है। शव को बरसते पानी में रखा गया था। मृतकों के परिजनों ने बताया कि दाह संस्कार के लिए लकड़ी ढूंढने उन्हें बरसते पानी में 4 से 5 घंटे मशक्कत करनी पड़ी। वन विभाग के डिपो में लकड़ी नहीं होने से उन्हें साबुन फैक्ट्री से लकड़ी खरीदनी पड़ी। तब जाकर वे शव का दाह संस्कार कर पाए।
इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए नगर पालिका उपाध्यक्ष रवि जायसवाल ने वन विभाग के अफसरों से चर्चा की। उन्होंने शीघ्र ही जलाऊ लकड़ी डिपो में उपलब्ध कराने की मांग की। इसके पूर्व भी श्री जायसवाल ने दल्लीराजहरा के समीपस्थ ग्राम साल्हे में लगे जिला स्तरीय जन समस्या निवारण शिविर में जलाऊ लकड़ी स्थानीय डिपो में उपलब्ध कराने संबंधित विभाग के रेंजर अन्य अफसरों को आवेदन दिया था। इसके बाद भी अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने अफसरों की अनदेखी पर नाराजगी जाहिर की है। डिप्टी रेंजर अल्बर्ट कुजूर से चर्चा के दौरान श्री जायसवाल ने कहा कि रविवार को गांधी चौक पुराना बाजार क्षेत्र में दो लोगों की मृत्यु हो गई है। शव को परिजन दाह संस्कार स्थल भी ले जा चुके हैं, लेकिन शहर में किसी भी डिपो चोरहापड़ाव वन विभाग के डिपो में दाह संस्कार के लिए लकड़ी उपलब्ध नहीं है। वन विभाग के रेंजर एमएस डोंगरे की लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी है। ऐसे में मृतकों के परिजन परेशान हैं।
लकड़ी की खपत अधिक
डिप्टी रेंजर अलबर्ट ने कहा कि हर साल विभाग की ओर से 50 चट्ठा जलाऊ लकड़ी की मांग की जाती है। लेकिन इस साल लकड़ी की खपत अधिक होने से 2 दिन पूर्व ही डिपो से लकड़ी खत्म हो गई। विभाग से 100 चट्ठा लकड़ी की मांग की जाएगी, ताकि स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की परेशानी हो।