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- वीरेंद्र सिंह ने नीम पेड़ के सात फेरे लेकर दहेज में लिए 11 पौधे
वीरेंद्र सिंह ने नीम पेड़ के सात फेरे लेकर दहेज में लिए 11 पौधे
राखी पेंटिंग से भी संदेश
‘मेरीअंतिम इच्छा है कि मेरे शरीर को नहीं जलाया जाए बल्कि जमीन में गड़ा दिया जाए जिससे मेरा शरीर खाद बनकर किसी पौधों को बढ़ने में मदद कर सके’ - उक्त विचार है पर्यावरण संरक्षण को अपने जिंदगी का लक्ष्य बनाने वाले ग्रीन कमांडो वीरेंद्र सिंह का।
शासन-प्रशासन द्वारा पर्यावरण को हरा-भरा बनाए रखने के लिए लोगों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने के लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। लेकिन वीरेंद्र सिंह ने अपना पूरा जीवन ही पर्यावरण के नाम पर कर दिया है। ग्रीन कमांडों के नाम से क्षेत्र में पहचान बनाने वाले श्री सिंह ने आज से 17 वर्ष पूर्व अपने मोहल्ले में पीपल का पौधा लगाकर अपने अभियान की शुरुआत की थी जो अब एक विशाल पेड़ बन गया है। 10 सालों तक प्राइवेट स्कूल में शिक्षकीय कार्य करते हुए 25 बच्चों की टीम गठित कर हर शनिवार को आसपास के गांवों में सफाई अभियान पौधारोपण कर लोगों को पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने का संदेश देने का अभियान चला रह हैं। वे अपने वेतन का एक हिस्सा पर्यावरण संरक्षण के लिए खर्च करते रहे हैं। हर साल पक्षियों के भोजन एवं पानी के लिए मिट्टी के 500 पात्र वितरित करते हैं। नौ साल पहले वार्ड 16 पावर हाउस एवं कोंडेकसा के भूमि में बच्चों को साथ मिलकर 300 करंज के पौधे लगाए थे, जो आज पेड़ बन गए हैं।
सन 2005 में राज्यपाल द्वारा तरुण भूषण पुरस्कार एवं 2011 में छ.ग. जल स्टार अवार्ड सहित पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कई बार सम्मानित हो चुके ग्रीन कमांडो वीरेंद्र सिंह का उद्देश्य ही लोगों को पर्यावरण के प्रति लगाव पैदा करना हैं ताकि वे स्वयं इससे जुड़कर पर्यावरण को हरा-भरा बना सके।
लोगों को नो पॉलीथिन अभियान से भी जोड़ रहे
2वर्ष पूर्व उन्होंने अपनी शादी के दौरान दहेज में आम, नीम, जाम के 11 पौधे लिए तथा कांकेर के राजापारा में स्थित नीम के विशाल पेड़ का 7 फेरा लेकर विवाह किया सिंह एड्स जागरूकता, साक्षरता अभियान, मतदाता जागरूकता, सर्वशिक्षा पल्स पोलियो तथा नो पॉलीथिन अभियान से भी जोड़ रहे हैं।
बेकार कपड़ों को इकट्ठा कर रक्षा बंधन के दिन विशाल राखी बनाकर लोगों को अधिक से अधिक पौधा लगाने के लिए प्रेरित किया है।
नौ साल पहले लगाए करंज के तीन सौ पौधे पेड़ बन गए।