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मुट्ठीभर चांवल ने बदल दी सुदामा की तकदीर : तोरण जी महाराज
वार्ड16 कांडे दफाई के गौरी मंदिर में श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ सप्ताह आयोजन में कांकेर से आए महाराज तोरण कुरना ने गुरुवार को भगवान श्री कृष्ण सुदामा की दोस्ती की कथा सुनाई।
उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि सांसारिक जीवन में कभी मित्रता करना हो तो कृष्ण सुदामा की भांति करो। दोनों की मित्रता ने संसार को जो संदेश दिया है वह मानव जीवन के लिए प्रेरणास्पद है। सुदामा गरीब ब्राम्हण तो थे लेकिन एक महान ज्ञानी पुरुष भी थे। जिन्होंने प्रेम के भावार्थ को सही मायने में समझा। तभी तो उन्होंने असीम विराट सत्ता वाले श्रीकृष्ण को अपना सखा बना लिया। मात्र दो मुठ्ठी चावल के बदले दो लोकों का राज्य सुदामा ने भगवान से पा लिया। उन्होंने कहा कि जब भी मन में लोभ एवं पाने की इच्छा हो तभी मित्रता का भाव उत्पन्न होता है। जो मित्र के दुख में दुखी हो और सुख में सुखी हो पशु समान है। सुदामा को अपने शिक्षा काल के दौरान जब गुरू माता ने जंगल भेजा तो साथ में कुछ चने में भी दिए और कहा कि भूख लगने पर वह अपने सखा श्री कृष्ण के साथ मिलकर चने खाले। लेकिन सुदामा थोड़े से चने के लालच में आकर स्वयं पूरे चने खा गए और श्रीकृष्ण को चने से वंचित रखा। इस छोटी सी भूल का प्रायश्चित सुदामा को जीवन पर्यंत तक दरिद्र बनकर करना पड़ा। इस कथा के माध्यम से उन्होंने श्रोताओं को अपने मित्रों तथा परिजनों से बिना किसी स्वार्थ भाव के पूरे सच्चे मन से व्यवहार रखने की बात कहीं। मन में उठा थोड़ा सा लालच ही भविष्य में बड़े-बड़े संकटों को जन्म देता है। कार्यक्रम में वार्ड क्रमांक 14, 16 एवं 17 के वार्डवासी सहित कोंडेकसा के बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला एवं पुरुष कथा का रसपान ले रहे हैं।