चिखलाकसा व जिला अस्पताल में लगा ग्लूकोज अलार्म सिस्टम
अब अस्पताल में ग्लूकोज का बाटल खत्म होने से पहले मेडिकल स्टॉफ को सूचना मिल जाएगी। मेडिकल स्टाफ मरीज के पास जाकर बाटल चेंज कर सकेंगे या मरीज के इलाज के लिए अलर्ट रहेंगे। ग्लूकोज अलार्म सिस्टम को मंगलवार को पहले जिला अस्पताल व चिखलाकसा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लगाया गया है, इसका डेमो भी सफल रहा। इस तरह का यह पहला प्रयोग प्रदेश में किया गया। इस सिस्टम को विज्ञान आधारित माॅडल प्रदर्शनी में आदर्श स्कूल बालोद के 11 वीं के छात्र सौरभ कुमार ने इजाद किया तथा इसकी खामियों को दल्लीराजहरा के इलेक्ट्रिएशन भूपेंद्र ने दूर करते हुए इसे वायर लैस में बदल दिया। इस मॉडल को नई दिल्ली में भी सराहा।
65 मीटर तक आवाज
सुधारक भूपेंद्र ने बताया कि अलार्म की आवाज रेंज 65 मीटर तक है, इसे मंगलवार को जिला अस्पताल के पुरुष वार्ड में लगाया गया। अलार्म नर्स कक्ष में रखा है। उसने बताया कि 500 एमएल ग्लूकोज से भरे बॉटल में जब द्रव्य पदार्थ की मात्रा करीब 45 एमएल बचती है तब अलार्म बजने लगता है, इसी से संबंधित मेडिकल स्टाफ जान जाता है कि बोतल में कितना द्रव्य पदार्थ बचा है। व्यस्थापक ओपी वर्मा ने बताया कि नए भवन में अस्पताल के शिफ्ट होने के बाद इसे विस्तार किया जाएगा।
इंस्पायर अवार्ड में माॅडल
लिमोरा के किसान मन्नालाल के बेटे कृषि संकाय के 11 वीं के छात्र सौरभ कुमार का अलार्म सिस्टम माॅडल जिला व राज्य स्तर पर प्रथम रहा। छात्र का चयन राष्ट्रीय स्तर स्पर्धा के लिए हुआ था।
ग्लूकोज स्टैंड से कनेक्ट
नर्स या डाॅक्टर को भी अलर्ट किया जा सकेगा, इस सिस्टम की एक खासियत ये भी है कि ये एक साथ कई ग्लूकोज स्टैंड से कनेक्ट हो सकता है। फिलहाल अस्पताल में अभी एक ही वार्ड को इस सिस्टम से कनेक्ट किया गया है।
डोर बेल से मिला आइडिया
भूपेंद्र का कहना है कि ग्लूकोज अलार्म सिस्टम बनाने का आइडिया सौरभ के माॅडल को देखने के बाद आया। उसमें सुधार करने उसने डोर बेल सिस्टम से आइडिया लिया। यह सिस्टम डोर बेल की तरह ही काम करता है।
दसवीं तक पढ़ा है भूपेंद्र
माॅडल को हकीकत में सुधार कर बदलने वाला भूपेंद्र दसवीं तक पढ़ा है। कुछ कारणवश उसने आगे पढ़ाई नहीं की। विज्ञान में रुचि लेते उसने सौरभ के माॅडल को देखने के बाद उसे और सरल करने की ठानी
भूपेंद्र ने बनाया वायर लेस सिस्टम
18 व 19 अगस्त को दल्लीराजहरा में जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में मॉडल प्रतियोगिता हुई, जहां पहले 11 वीं के छात्र सौरभ कुमार ने इसे प्रस्तुत किया कलेक्टर राजेश सिंह राणा ने इस माॅडल को जिला अस्पताल में लागू करने के निर्देश भी दिए। सौरभ ने दिल्ली में भी इस माॅडल का प्रदर्शन किया। सौरभ के माॅडल में कुछ खामियाें को दूर करते हुए दल्लीराजहरा गृह ग्राम परना (अर्जुंदा) के 24 वर्षीय युवक भूपेन्द्र कुमार आरदा ने वायर लेस सिस्टम में बदल दिया। वह 15 सौ रुपए शुल्क लेकर ये सिस्टम अस्पतालों में लगा रहा है।
अस्पताल में ग्लूकोज अलार्म सिस्टम।
बालोद। अस्पताल में लगा अलार्म।