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शहर में गार्डन पांच और माली सिर्फ एक

7 वर्ष पहले
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कई छोटे गार्डनों का अस्तित्व खतरें में

नियमित रूप से घास भी नहीं काटी जा रही,शहर को बरसों से हैं अच्छे गार्डन का इंतजार।

भास्करन्यूज|धमतरी

गार्डनके नाम से ही सुंदरता का बोध होता है, लेकिन धमतरी निगम क्षेत्र के उद्यानों पर शायद यह परिभाषा लागू नहीं होती। आमतौर पर बाग-बगीचाें में सुंदर पौधे,झूले और पर्याप्त साफ-सफाई के साथ जैसा मनोहारी वातावरण होता है,निगम क्षेत्र के उद्यानों में नहीं दिखाई देता। एक रमसगरी गार्डन को छोड़कर सवा लाख की आबादी के लिए ढंग का दूसरा गार्डन नहीं है। एक करोड़ रूपए की भारी-भरकम रकम खर्च करने के बाद भी रामसागर उद्यान की हालत किसी से छुपी नहीं है।इसे निगम प्रशासन की अनदेखी कहें या जनप्रतिनिधियों की लापरवाही कि नागरिकों को आज तक एक सर्वसुविधायुक्त गार्डन नहीं मिल पाया।

निगम दफ्तर के बाहर एक छोटा सा गार्डन है। इसके अलावा नेहरू गार्डन,रामसगरी गार्डन, कारगिल उद्यान,हटकेशर उद्यान है। आलम यह है कि सभी गार्डनों में नियमित रूप से घास भी नहीं काटी जा रही है। लॉन में नर्म घास की जगह खरपतवार ने ले ली है। नंगे पांव घास पर चलने के शौकीन मन मसोस कर रह जाते हैं क्यांेकि लॉन बेतरतीब जंगल सा नजर आता है। लंबे जंगली पौधो के बीच विषैले जीव-जंतु होने का डर बच्चों को भी खेलने से रोकता है। रही बात सुंदरता की तो इन बगीचों में शोपत्ती,फूल ढूंढना पड़ता है। गार्डनों की अपेक्षित देखभाल नहीं होने के पीछे मालियों की कमी भी एक बड़ा कारण है। निगम क्षेत्र के तमाम उपवनों की देखरेख के लिये सिर्फ एक माली नियुक्त किया गया है। उसे ही घूम-घूम कर बागवानी करनी पड़ती है।

प्रकाशव्यवस्था बेकार

गार्डनोंमें हरियाली,सुदंरता,बागवानी के साथ प्रकाश की भी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। दिन ढलते ही कई बगीचो में अंधेरे का साम्राज्य हो जाता है। कारगिल,हटकेशर उद्यान में तो चारो ओर अंधेरा छाया रहता है। रमसगरी गार्डन की भी कई लाइटें बंद हैं। नेहरूगार्डन में तो बीते दो सालों से रास्ते की लाईटे बंद हैं। अलसुबह या दिनढले इन रास्तों पर टहलने वालों के मन में जहरीले कीड़े-मकोड़ो का डर बना रहता है,जिससे वे गार्डन की जगह बाहर सड़क पर ही जॉगिंग करने मजबूर है। नेहरू गार्डन का फव्वारा खराब हुआ तो आज तक नही सुधरा,निगम दफ्तर के बाहर के गार्डन का भी यही हाल है।नौनिहालों के खेलने के लिए लगाए गए तमाम झूले भी अपनी