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तकलीफ पूछकर झोलाछाप डाक्टर बांट रहे दवा

7 वर्ष पहले
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दुकानें बंद, गुपचुप इलाज

शहर-ग्रामीण क्षेत्रों में किराना दुकान, गुमटी ठेलों में बिक रही एलोपैथी दवाएं, जिन्हें अधिकार नहींं वे भी बेच रहे दवा।

भास्करन्यूज |धमतरी

जिलेमें झोलाछाप डाक्टर एमबीबीएस डाक्टर बनकर इलाज कर रहे, वहीं ठेला, गुमटी किराना दुकानों में जीवन रक्षक दवाएं बेची जा रही हैं। गांव की संकरी गलियों मेंे स्थित किराना दुकान, ठेले में हर मर्ज की दवा बिक रही। पढ़े- लिखे नहींं फिर भी अंग्रेजी दवाएं बेच रहे हंै।

गत दिनों पेंडरवानी के एक झोलाछाप डाक्टर के इलाज से दो लोगों की मौत हो गई। यह पहली घटना नहींं है। इसके पूर्व भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हंै। सस्ते के फेर में कई जानंे जा चुकी हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कागजों में ही आदेश-निर्देश जारी कर खानापूर्ति कर रहे हंै।

जानकारी के अनुसार जिले में 2 हजार से अधिक झोलाछाप डाक्टर हैं, जो रोजाना हजारों रोगियों का उपचार कर रहे हैं। तकलीफ छोटी हो या बड़ी, रुपए ऐंठने खुद ही इलाज कर ठीक करने में जुट जाते हैं। हद तो तब हो जाती है, जब मरीज की गंभीर बीमारी और स्थिति को देखने के बाद भी झांसा देते रहते हैं। ऐसे झोलाछाप डाक्टरों पर कार्रवाई के नाम पर शुरू से खानापूर्ति ही हो रही है। जिला प्रशासन भी इस ओर ठोस कदम नहींं उठा रहा।

बिलासपुर के पेंडारी में हुए नसबंदी कांड ने पूरे देश को हिला दिया। दवा से मौत होने की पुष्टि के बाद सरकार हरकत में आई। मेडिकल दुकानों से प्रतिबंधित दवा जब्त की गई। इधर शहर गांव की गलियों में कदम-कदम पर ठेला, गुमटी और किराना दुकानों में दवाई बिक रही है। बेचने वाले पढ़े-लिखे भी नहींं हैं। तकलीफ बताते ही ये प्लास्टिक के डिब्बे में से दवा निकालकर थमा देते हंै। रंगों से पहचानकर सर्दी, बुखार, दर्द आदि की दवा दी जाती है।

जीवन रक्षक दवाएं सिर्फ लायसेंसी मेडिकल स्टोर्स में ही बेची जा सकती हैं, लेकिन यहां कोई भी दवा बेच रहा है। स्वास्थ्य विभाग भी इसे गलत ठहरा रहा है, लेकिन कार्रवाई करने के लिए हाथ आगे नहींं बढ़ा रहा।

ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी समस्या ज्यादा है। किराना दुकान, गुमटी में दवा कब से रखी है, एक्सपायरी तो नहींं हुई, यह सोचे बगैर दवा बेची और खरीदी जा रही है। एक्सपायरी दवा कितनी घातक है, इसे भी लोग नजर अंदाज कर रहे।

कहा जा रहा है कि पेंडरवानी में झोलाछाप डाक्टर के इलाज से मौत