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धमतरी महापौर आरक्षण को हाईकोर्ट में चुनौती
आरक्षण पर टिकी नजरें, 2 को फैसला
नए-पुराने निगमों को मिलाकर महापौर के लिए निकाल दी लाटरी। नए सिरे से आरक्षण के लिए दायर की याचिका। कोर्ट ने मांगा 4 हफ्ते में जवाब।
भास्करन्यूज |धमतरी
नगरपालिका से नगर निगम बने धमतरी के पहले महापौर पद के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पिछले दिनों राजधानी में पूरी की गई। प्रदेश के पुराने दस नगर निगमो के साथ दोनो नए निगमो को जोड़कर लाटरी निकाली गई, जिसमें धमतरी महापौर का पद अनारक्षित महिला के खाते में गया। इसे लेकर ही पूर्व पार्षद एवं छात्रसंघ अध्यक्ष अनुराग मसीह ने हाईकोर्ट बिलासपुर में याचिका दायर कर आपत्ति जताई है।
श्री मसीह ने अपने याचिका में कहा है कि शहीद स्मारक भवन रायपुर में 1 सितंबर 2014 को अपनाई गई प्रक्रिया विसंगतिपूर्ण है। 15 अगस्त 2014 को प्रदेश के मुख्यमंत्री के संदेश के माध्यम से नगर पालिका को निगम बनाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद 21 अगस्त को नगर पालिका परिषद धमतरी को भंग कर यहां प्रशासक के रूप में कलेक्टर को चार्ज दिया गया। इस तरह नगर पालिका से नगर निगम के रूप में धमतरी पहली बार अस्तित्व में आया।धमतरी बीरगांव दोनो नए नगर निगम हैं। दोनो स्थानों में पहली बार महापौर के लिए चुनाव होगा, इसलिए यहां महापौर आरक्षण के लिए नये सिरे से प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। लेकिन शासन ने अन्य पुराने 10 निगमों के साथ ही दोनो नए निगम धमतरी एवं बीरगांव के लिए सम्मिलित रूप से आरक्षण प्रक्रिया अपनाई और सभी 12 निगमों के लिए एक साथ लाटॅॅरी निकाली। नए निगम के लिए यह प्रक्रिया गलत एवं अवैधानिक है।
श्री मसीह का कहना है कि महापौर सीट के लिए इसे बिना किसी लाटरी निकाले पुराने नगर पालिका अध्यक्ष के सीटों का रिकार्ड देखकर महिला सीट घोषित कर दिया गया। जबकि धमतरी नया निगम है और पूर्व नगर पालिका अध्यक्षो का आरक्षण रिकार्ड नए नगर निगम में लागू नहीं हो सकता। उन्होने कोर्ट से आरक्षण रद्द कर नए सिरे से आरक्षण करने की मांग की है।श्री मसीह ने बताया कि हाईकोर्ट ने उसकी याचिका स्वीकार कर लिया है और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय निकाय विभाग को जवाब देने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है।
शासनने गंभीरता से नहीं लिया
पूर्वछात्रनेता ने बताया कि उन्होने आरक्षण प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव को ज्ञापन दिया था और आरक्षण प्रक्रिय