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ऋण पुस्तिका नहीं तो कैसे कराएं पंजीयन

7 वर्ष पहले
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ऋणपुस्तिका किसानों के लिए बड़े काम की चीज है। इससे धान खरीदी के लिए पंजीयन के साथ बैंक कर्ज,बी वन खसरा एवं अन्य कार्यो में काम आता है। किल्लत से उक्त सभी काम प्रभावित हो रहे हैं।

एकभी पुस्तिका नहीं

^कार्यालयमें 15 दिन से एक भी ऋण पुस्तिका नहीं है। दो माह पूर्व पुस्तिका पहुंचने पर वितरण किए थे। छपाई के लिए आर्डर दे दिए हंै। अश्वनीकुमार चौहान,सहायक ग्रेडतीन

पटवारियों के पास ढाई महीने से नही है ऋण पुस्तिका,भटक रहे किसान।

भास्करन्यूज|धमतरी

समर्थनमूल्य में धान बेचने के लिए किसानों को सोसायटी में पंजीयन कराना अनिवार्य है। इधर ऋण पुस्तिका नहीं होने से अनेक किसान पंजीयन नहीं करा पा रहे। ऋण पुस्तिका (किसान किताब) के लिए पटवारियों का चक्कर काट रहे हैं। थक हारकर वे तहसील दफ्तर के कानूनगो शाखा में पहुंच रहे वहां भी ऋण पुस्तिका खत्म हो गया है। किसानों के सामने गंंभीर समस्या गई है कि वे धान बेचने के लिए कहां से पुस्तिका लाएं और अपना पंजीयन कराएं।

राजनांदगांव के सहकारी प्रिटिंग प्रेस से किसान किताब छपकर आता है। पिछले 2-3 साल से ही जिले में इसकी किल्लत है। कभी कभी ही मिलता है, लेकिन खपत के मुकाबले वह नाकाफी होता है। जिले में ऋण पुस्तिका की मासिक खपत दो से ढाई हजार है,जबकि प्रिटिंग प्रेस से 4-5 माह में 2 से 3 हजार ही मिलती है। यही कारण है कि आए दिन तहसील एवं पटवारी दफ्तर में किसान पुस्तिका के लिए भटकते रहते हैं।

जिलेके किसान हलाकान

ऋणपुस्तिका के लिए भटक रहे संबलपुर के किसान नरोत्तम साहू,आमदी के महेश ध्रुव,चंपालाल नेताम,बरारी के योगेन्द्र साहू ने बताया कि बारिश में ले-देकर फसल को बचाने में सफल हुए।अब धान बेचने के लिए सरकार के कायदे से परेशान हो रहे हैं। ऋण पुस्तिका के बिना पंजीयन नहीं हाेगा। पुस्तिका पटवारी के पास है, ही तहसील दफ्तर के कानूनगो शाखा में। एेसे में किसानों पर आफत गई है। ऋण पुस्तिका खत्म होने से बी वन खसरा भी नहीं ले पा रहे। धान खरीदी के ऐन मौके पर ऋण पुस्तिका की किल्लत से हलाकान हो रहे हैं। अधिकारी पुस्तिका नहीं आने की बात कर रहे।

पटवारीभी काट रहे चक्कर

किसानोंके साथ पटवारी भी किसान पुस्तिका के लिए चक्कर काट रहे हैं। पिछले दो माह से अधिकांश पटवारियों के पास किसान पुस्तिका नहीं है। शहर का भी बुरा हाल है। र|ाबांधा,गोकुलपुर पटवारी के पास भी