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तहसील में नक्शा-खसरा के लिए काट रहे चक्कर

7 वर्ष पहले
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नागरिकोंको बी-वन, नक्शा,नकल, खसरा आदि के लिए पटवारियों का चक्कर काटने से राहत तो मिल गई पर समस्या कम नहीं हुई। अब भी रूपए खर्चने पड़ रहे हैं। साथ में प्रक्रिया पूरी होने में चार से छ: दिन लग रहे हंै। तहसील कार्यालय में किसी प्रकरण का नकल,नक्शा लेना हो तो प्रत्येक पेज में 10 रूपए का टिकट लगाया जाता है। ऐसे में यदि 10 पेज का हो तो लोगों को 100 रूपए का टिकट लगाना पड़ता है। इसके अलावा नकल आवेदन में 10 रूपए का अलग से टिकट लगवाया जाता है। कलेक्ट्रेट में भी इसी तरह का टिकट लगवाया जाता है।

तहसील कार्यालय में रोजाना लोग बड़ी संख्या में लोग बी-वन, नकल, नक्शा के लिए पहुंचते हैं। पहले दिन तो यहां सिर्फ नकल आवेदन ही लिया जाता है। आवेदन में 10 रूपए का टिकट पहले लिया जाता है और संबंधित आवेदक को दो-तीन दिन बाद आने कहा जाता है। अक्सर लोग दूसरे तीसरे दिन पहुंचते हंै तो उन्हंे प्रभारी अधिकारी का साईन नहीं होने की बात कही जाती है। इस तरह दो-तीन दफा चक्कर लगाना पड़ता है। आने-जाने में ही डेढ-दो सौ रूपए खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा प्रत्येक पेज का 15 रूपए शुल्क भी लिया जाता है। इसे लेकर लोगों में नाराजगी है।ग्राम नवागांव के भूपेन्द्र साहू, कलीराम साहू, गजाधर उइके, बिरेतरा के जीवधन साहू, मोहित साहू ने कहा कि प्रशासन ने इस प्रक्रिया का सरलीकरण करने की बात कही थी, लेकिन यह जटिल प्रक्रिया हो गई है। ऐसा कभी नहीं होता कि आवेदन देने के बाद उसी दिन शाम तक संबंधित दस्तावेज कम्प्यूटर से मिल जाए। अगर ऐसा ही चलता रहा तो आम लोग परेशान होते रहेंगे। लोगों का कहना है कि आवेदन से लेकर प्रतिलिपि मिलते तक उन्हें रूपए अदा करने पड़ते हैं। जिला प्रशासन इस पर त्वरित व्यवस्था दे।

कोर्ट से पांच गुना आता है खर्च

कोर्टमें नकल आवेदन के लिए सिर्फ दो रूपए का टिकट लिया जाता है और 10 पेज के सत्य प्रतिलिपि में प्रत्येक पेज पर दो-दो रूपए का टिकट लगवाया जाता है। इस तरह 10 पेज में 20 रूपए का ही खर्च होते हंै जबकि तहसील कोर्ट में यही खर्च 105 रूपए का हो जाता है। इसके अलावा चक्कर भी काटने पड़ते हैं।

एकदिन में देने का प्रयास

^एकही दिन में नकल, नक्शा देने के प्रयास होते हैं। जो शुल्क लिए जाते हैं, शासन से ही निर्धारित है। प्रकरण अधिक होने पर समय लगता है। जेएलयादव, तहसीलदारधमतरी

क्या है शासन की पहल

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