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घट रहा सरकारी स्कूलों का आकर्षण

6 वर्ष पहले
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जिलेके सरकारी प्रायमरी स्कूलों में बच्चों की दर्ज संख्या लगातार घट रही है। संख्या कम होने के बाद भी जिला शिक्षा विभाग मौन है। बच्चों की संख्या बढ़ाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है जो चिंतनीय है। सरकार की नि:शुल्क सर्व शिक्षा अभियान में धूल जमती नजर रही है।

साल दर साल बच्चों की संख्या घटने से प्रायवेट स्कूलों की पौ बारह हो रही है। आखिर वे कौन से कारण हंै जिससे सरकारी स्कूलों से पालकों और बच्चों का मोहभंग हो रहा है।इस वर्ष जिले के विभिन्न सरकारी स्कूलों के प्राथमिक विभाग में 74031 बच्चे अध्ययनरत हंै, पिछले वर्ष के मुकाबले 12861 विद्यार्थी कम है। पिछले शैक्षणिक सत्र में प्रायमरी में 86892 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। आखिर अन्य बच्चे कहां गए।

सभी बच्चे निजी स्कूल,केन्द्रीय विद्यालय या नवोदय विद्यालयों में एडमिशन तो नहीं ले लिए या फिर सरकारी नौकरी में तो नहीं चले गए। सरकारी स्कूलों में सुविधाओं का इजाफा दिन दूनी रात चौगुनी हो रही है फिर भी बच्चों की संख्या हजारों में घट रही है। यह जांच का विषय है।

नवोदय विद्यालय में प्रवेश के लिए परीक्षा हुई

मगरलोड|नवोदयविद्यालय में चयन के लिए पात्रता परीक्षा का आयोजन विकासखंड के तीन शालाओ मंे शनिवार को किया गया। अपने छाेटे बच्चों काे लेकर पालक केन्द्रों में पहुंचे। कक्षा पंाचवी मंे अध्ययनरत 441 बालक एवं 496 बालिका इस परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा के लिए शा बालक उमा शाला में 265 बालक 50 बालिका, शासकीय कन्या शाला में 177 बालक एवं 138 बालिका, शासकीय कन्या उमा शाला भैंसमुंडी में 308 बालिका सहित कुल 930 विद्यार्थी परीक्षा दिलाए है। केन्द्र प्रभारी सीआर साहू, एनआर साहू नेमीचंद हिरवानी थे। परीक्षा निरीक्षक बीआर नाग ने बताया कि परीक्षा के लिए 17 पर्ववेक्षक नियुक्त किया गया था परीक्षा शांतिपूर्वक हुआ।

अाकर्षित कर रही आधुनिक व्यवस्था

सरकारीस्कूलों में पढ़ाई का स्तर कमजोर होने के कारण बच्चों और पालकों का मोहभंग हो रहा है। पालक भी बच्चों की पढ़ाई की ओर ज्यादा ध्यान देकर प्राईवेट स्कूलों में एडमिशन दिला रहे हैं। पालक देवीलाल मनोज विश्वकर्मा ने बताया कि उनके बच्चे कक्षा तीसरी में पढ़ाई करने के बाद पहाड़ा और गिनती तक नहीं जानते। उन्हें अक्षर ज्ञान भी नहीं है। इसी तरह एक अन्य पालक शैलेन्द्र निर्मलकर ने बताया कि उनके बच्चे अब निजी स्कूल में पढ़ रहे हैं। उनका पढ़ाई का स्तर संतोषजनक है। शिक्षा विभाग आखिर गुणवत्ता बरकरार क्यों नहीं रख पा रहा है।