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गाय के बगैर सनातन धर्म की कल्पना नहीं

6 वर्ष पहले
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गौकथामृत में महापुरुषों की बताई गई महत्ता।

भास्करन्यूज |धमतरी

मिशनग्राऊंड में आयोजित गौ कथामृत के दूसरे दिन पं. राजेन्द्र दास देवाचार्य ने बताया कि कैसे आक्त पुरूषों की वाणी शास्त्र बन जाते हंै। उन्होंने आक्त पुरूष की परिभाषा बताते हुए कहा कि जाे करोड़ों व्यक्तियों के बीच निडर और साहसी बनकर अपनी बात रखे,वही आक्त पुरूष है। उनकी बात ही शास्त्र बनती है।

आक्त पुरूष का वचन शास्त्र के समान प्रमाणित होता है। तुलसीदास, मनु, गुरू वशिष्ट, गुरू विश्वामित्र सहित हमारे कई ऋषि, महापुरूष आक्त पुरूष हंै। कालांतर में उनकी कही गई बाते शास्त्र के रूप में आज हमारे सामने हैं। आक्त पुरूष उच्चकोटि के पंडित होकर साधारण मनुष्य ही है लेकिन सदाचारी के कारण वे हमेशा निडर होते है। उन्होने आगे कहा कि गाय के बगैर सनातन धर्म की कल्पना नहीं की जा सकती। आज गो वध का ही परिणाम है कि मनुष्य का पतन हो रहा है। जो व्यक्ति गौ श्रवण, माता-पिता की सेवा नहीं कर सकता वह जीते हुए भी मृत समान है। राष्ट्र में गाय को राष्ट्र देव का दर्जा देना चाहिए।

इस मौके पर दीपक लखोटिया, लखमशी भानुशाली, रूपेश राजपूत, बिहारीलाल अग्रवाल, अजय जैन, दिलीप बडजात्या, सरिता दोषी, भावना राठी, सुनिता भट्ठड, राधेश्याम शर्मा, भूषण सेठिया, संदीप पांडे आदि उपस्थित थे।

वध से नरक का भागी

महाराजश्रीआगे कथा में बताया कि गौवध से मनुष्य नरक का भागी होता है। इसके साथ अन्य पशुपक्षियों का हत्यारा नरक को प्राप्त होता है। इसलिए हमें पशु हत्या से बचना चाहिए। सदाचार का पालन करते हुए सभी को शाकाहारी बनना होगा। उन्होंने गौ महत्व को बताते हुए कहा कि सृष्टि में गाय जैसा कृतज्ञ प्राणी नहीं है, प्रेम को स्वीकार करने वाला तथा उपकार का ऐसा उत्तर देने वाला गाय अड़सट करोड़ तीर्थ एवं तैंतीस करोड़ देवताओं का चलता फिरता विग्रह गाय ही है। संकट सहकर भी हमें गाय का सेवा करना चाहिए।

धमतरी. मिशन मैदान में कथा सुनाते पंडित राजेन्द्र दास देवाचार्य।