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7 फीट गिरा शहर का भू जलस्तर

6 वर्ष पहले
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जिले में भूमिगत जलस्त्रोतों को बचाए रखने कोई कारगर उपाय अब तक नहीं किए गए। हर साल गर्मी लगने के पहले वाटर लेवल 7 से 10 फीट तक नीचे चला जाता है। अप्रैल- मई में तो स्थिति और विकराल हो जाती है।

सतह से 80 फीट तक गिरावट दर्ज की गई। जिले का औसत वाटर लेवल 57 फीट माना जाता है लेकिन अनुचित दोहन के कारण भू जल स्तर 72 से 75 फीट तक नीचे चला जाता है। सभी प्राकृतिक जलस्त्रोत सूख जाते हैं या आधे से कम हो जाते हैं। फिर भी दोहन अनवरत जारी रहता है। गर्मिंयों में तो पानी की एक बूंद के लिए भूमिगत जलस्त्रोंतों पर निर्भर रहना पड़ता है।

पीएचई विभाग से मिली जानकारी के अनुुसार जिले के धमतरी ब्लाक में वाटर लेबल 62 फीट, कुरूद का 51 फीट, नगरी का 52 फीट, मगरलोड का 61 फीट है जिसे औसत वाटर लेवल माना जाता है। गर्मी लगने से पहले जलस्तर धीरे धीरे गिरना शुरू हो जाता है। जनवरी-फरवरी माह में ही धमतरी ब्लाक का वाटर लेवल 7 फीट तक नीचे गिर गया है। अप्रैल-मई के आते-आते 72 से 75 फीट तक नीचे चला जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भूमिगत जलस्त्रोतों का अत्यधिक दोहन के कारण जल स्तर तेजी से गिर रहा है।

प्राकृतिक जल स्त्रोतों के नष्ट होने और वर्षा जल का संचय करने से भी इसपर व्यापक असर पड़ रहा है। विभाग का कहना है कि 2012 में जलस्तर सबसे ज्यादा गिरा था। मौजूदा वर्ष में वाटर लेवल 75 फीट से भी नीचे चला गया था।

वाटर हार्वेस्टिंग आवश्यक

^वर्षाजल संग्रहण के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सबसे कारगर उपाय है। सिस्टम का उपयोग हर शहर, गांव में होना चाहिए। खपरैल वाले मकानों में सोख्ता बनाकर जलस्रोतों को बढ़ाया जा सकता है। जीएनरामटेके, ईई पीएचई

संचित निधि खत्म हो रही

भूमिगतजलस्तर को बढ़ाने के उपाय नहीं होने से जल स्तर कम होते जा रहा है। धरती के अंदर के पानी को उपयोग में ले लेते हंै लेकिन उसमें डालने का काम नहीं हो रहा है। जलस्तर का तेजी से घटना चिंतनीय है। भावी पीढ़ी के लिए जल संचय आवश्यक है।

धमतरी. भूमिगत जल स्तर कम होने से बंद होने लगे हैंडपंप।