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शादियां हजारों में, पंजीयन हुआ 117 का

6 वर्ष पहले
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विवाहपंजीयन कराना अनिवार्य है। फिर भी लोग इस नि:शुल्क योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हंै। सरकार की कई लोक कल्याणकारी कार्यो में इसकी जरूरत पड़ती है, फिर भी पंजीयन कराने में नागरिकों की रूचि नहीं दिख रही। काम अटक जाने पर आनन-फानन में पंजीयन कराने दफ्तरों का चक्कर काटते फिरते हैं।

निगम दफ्तर से मिली जानकारी के अनुसार बीते वर्ष 2014 में 117 लोगों ने विवाह पंजीयन कराया, जबकि शहर में शादियां लगभग हजार से ऊपर की संख्या में हुई है। 2015 के चालू माह जनवरी फरवरी में अब तक 8 लोगों ने ही पंजीयन कराया है। सरकार ने भी अब इसे नि:शुल्क कर दिया है। जननी सुरक्षा योजना सहित अन्य शासकीय अर्धशासकीय कामों में विवाह पंजीयन कार्ड की जरूरत पड़ती है।

पंजीयनके लिए दस्तावेज

पंजीयनशाखा के संतोष यादव ने बताया कि ज्यादातर शिक्षित वर्ग के लोग ही पंजीयन कराने आते हैं। स्लम एरिया के लोग बहुत कम ही पंजीयन कराते हैं।पंजीयन के लिए निमंत्रण कार्ड, शपथ पत्र, दो पासपोर्ट फोटो, जन्म और शैक्षणिक प्रमाण पत्र आदि की जरूरत पड़ती है।

च्वाईससेंटरों में करा सकते

शासनने नागरिकाें की सुविधा के लिए शहर में जन्म मृत्यु पंजीयन कराने दो च्वाईस सेंटरों को अधिकृत किया है, वहां भी मात्र 16 लोगों ने मृत्यु पंजीयन और 7 लोगों ने जन्म पंजीयन कराया। जन्म मृत्यु पंजीयन को लेकर शासन द्वारा जिला स्तर पर शहर और गांव में शिविर का आयोजन किया जाता है। वहां भी पंजीयन कराने में लोेगों की रूचि नहीं रहती।

धमतरी. जन्म-मृत्यु, विवाह शाखा में पंजीयन कराने नहीं पहुंच रहे हैं लोग।

जन्म-मृत्यु पंजीयन में भी रूचि नहीं

लाखोंकी आबादी वाले इस शहर में जन्म मृत्यु पंजीयन कराने में लोगों की रूचि अब तक नहीं बढ़ी है। बीते वर्ष 2014 में 6793 लोगों ने जन्म पंजीयन कराया है जिसमें में ज्यादातर ग्रामीण इलाकों से ज्यादा है। इस वर्ष 2015 के जनवरी फरवरी माह में 593 का पंजीयन है। ग्रामीण क्षेत्रों के लाेग शहर के सरकारी और प्राईवेट अस्पतालों में डिलवरी के आते हैं। अस्पताल सूची के अनुसार उनका पंजीयन यहीं से हो जाता है। मृत्यु पंजीयन 2014 में 1598 ने कराया, 2015 में चालू माह में 142 लोगों का पंजीयन हो चुका है।