शंकराचार्य ने धर्म पर दिया जोर
गोविंदी देवी ट्रस्ट की प्रशंसा
धर्मसभामें आगमन के पूर्व शंकराचार्य ने गोविंदी देवी गौरक्षा ट्रस्ट स्थल पहुंचे। 52 एकड़ में फैले गौशाला को देखकर उन्होंने इसके ट्रस्टी विद्यासागर एवं रामचरण रामगोपाल अग्रवाल की प्रशांसा की। उन्हें रैली के रूप में कार्यक्रम स्थल लाया गया। उन्होंने कहा कि गौ माता की रक्षा हम सबका कर्तव्य है।
धमतरी. धर्मसभा में उपस्थित जगतगुरू शंकराचार्य एवं संतगण।
धर्मसभा में कहा किसी नर को नारायण कहा जा रहा है उनको चलाने वालें कोई और है।
भास्करन्यूज धमतरी
जगतगुरूशंकराचार्य रविवार की शाम यहां अग्रसेन भवन में विद्यासागर गोविन्दी देवी ट्रस्ट द्वारा आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म का ज्ञान किसी मनुष्य के कहने से नही हो सकता। मनुष्य शरीर से ही ईश्वर से साक्षात्कार हो सकता है।
वेद मंत्रों से सनातन धर्म के ऋिष मुनियों ने भगवान से साक्षात्कार किया है। धर्म के द्वारा ही मन को परिमार्जित कर लेते है उन्हें भगवान का साक्षात्कार हो जाता है।
उन्होंने कहा कि अधर्म के रास्तें चलते है, उनसे भगवान दूर हो जाते है। परमात्मा सबके ह्रदय में विद्यमान है फिर भी लोग दुखी है, क्योंकि हमें उसकी पहचान नही है। करीब होते हुए भी अधर्म के रास्तें चलते है उनसे भगवान दूर है। शंकराचार्य ने सांई पर इशारों ही इश्ारों में कहा कि अपने आप को नारायण कह रहे है उनकों चलाने वाले कोई और है। जब से मनाव जाति है तब से सनातन धर्म है। भगवान श्रीराम के कुल और इतिहास प्रमाणित है तथा उनकी पूजा शास्त्र सम्मत है। किसी व्यक्ति को भगवान मानकर मंदिरों में बिठाना और उनकी पूजा करना सनातन धर्म के खिलाफ है।
कईसाल पहले धमतरी आए थे
जगतगुरूशंकराचार्य ने बताया कि बरसो पहले हनुमान प्रसाद के आमंत्रण पर वे धमतरी आए थे। यहां महानदी की तट पर कई दिनों तक पूजा पाठ तप किया था। उन्होंने बताया कि महानदी पवित्र गंगा की तरह है। धरमतराई का अर्थ डूबते हुए नाव है, जो धर्म को तारता है और यही धमतरी है।
चरणपादुका पर माल्यार्पण
92वर्षीय शंकराचार्य की जगह उनके पादुका पर माल्यार्पण किया गया। माल्यार्पण के लिए काफी भीड़ उमड़ गई। लिहाजा इस सिलसिला को बीच में ही रोककर कार्यक्रम आगे बढ़ाना पड़ा। कार्यक्रम को, िवधानसभा के पूर्व प्रतिपक्ष नेता रविन्द्र चौबे, गुरूमुख सिंह होरा, लेखराम साहू, प्रकाश उपाध्य