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कीचड़ से हो रही ग्राम लोहरसी की पहचान

7 वर्ष पहले
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गलियों में भरा रहता है पानी, नाली निर्माण को तरस रहे ग्रामीण।

भास्करन्यूज |धमतरी

कहनेको तो ग्राम लोहरसी जिला मुख्यालय की सीमा से लगकर ही बसा है। लेकिन विकास कार्यों का उजाला अब भी पूरी तरह नही फैल पा रहा है। इसे प्रशासन की अनदेखी कहंे या जनप्रतिनिधियों की नाकामी कि कुछ दिनों पूर्व तक निगम क्षेत्र में शामिल होने के कगार पर खड़े लोहरसी के नागरिक आज भी बुनियादी सुविधाओं की बाट जोह रहे है। सड़क, लाईट, साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं आज भी यहां पर्याप्त मात्रा में मौजूद नही है।

धमतरी से गुंडरदेही मार्ग से बमुश्किल एक किलोमीटर दूर लोहरसी ग्राम स्थित है, लेकिन गांव की बसाहट धमतरी तक पहुंचती जा रही है। गांव को जिला मुख्यालय का एक मोहल्ला भी कहा जा सकता है। किंतु यहां के हालात अन्य किसी गांव से अलग नही है।

शहर से नजदीकी का कोई फायदा इसे मिलता दिखाई नही देता। इसे दिया तले अंधेरा की मिसाल ही मानेंगे कि प्रशासन की नाक के नीचे बसे गांव के लोग छोटी-छोटी समस्याओं से दो चार हैं। इन समस्याओं की शुरूआत र|ाबांधा रोड से गांव जाने के रास्ते पर मुड़ते ही हो जाती है। कुछ दूर जाते ही जो पुल पड़ता है उसे रपटा ही कहना उचित होगा क्योंकि जरा ही बारिश होते ही इस पर पानी भर जाने से आवागमन प्रभावित हो जाता है। इसी तरह गांव में सर्वत्र कीचड़ का राज दिखाई देता है। बरसाती पानी के निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नही होने के कारण जरा ही बौछार से गांव की गलियों में मिट्टी-कीचड़ भर जाता है। जिस पर वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी दूभर है। नालियों में जमा पानी और कचरे की दुर्गंध घरों में फैल रही है। जगह-जगह पानी के जमाव से मच्छर, मक्खियों की बहुतायत ग्रामीणों के लिए बीमारियों का सबब बन रही है। गांव में स्ट्रीट लाईटों की संख्या अपर्याप्त है जो अक्सर बन ही रहती हैं।

शाम होते ही गांव में अंधेर छा जाता है। जिससे कीडे़- मकोडों का भय बना रहता है। गांव के प्रवेश द्वार से लेकर अंतिम छोर तक गंदगी का साम्राज्य है। जिले का नया शासकीय विश्राम गृह गांव की भूमि पर ही बनाया गया है। आए दिन वीआईपी यहां आते रहते है। प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी और राजनेताओं के अागमन से ग्रामीणों को कोई लाभ नही हो रहा। गांव के अमर सिंह, देवसिंग, सेवक राम साहू, पुरानिक राम, जगदीश ने बताया कि गांव में समस्याओं की भरमार है। गलियों के कांक्