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रवानगी हाईवा की,पीटपास बनाते हंै ट्रैक्टर का

7 वर्ष पहले
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जिला प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा खेल, डुप्लीकेट स्लीप में कम कर देते हैं घनमीटर।

भास्करन्यूज| धमतरी

रेतखदानों में माफिया खुलकर दोहन कर रहे। जिला प्रशासन की नाक के नीचे खनिज का खेल हो रहा है। कई खदानों की लिमिट खत्म हो गई है, फिर भी खुदाई जारी है। जेसीबी से खदानों में खुदाई पर अब तक प्रतिबंध नहींंं लग पाया। मनमर्जी से खुदाई और निकासी हो रही। अधिकारियों और खनिज माफियाओं की ऐसी सेटिंग है कि कार्रवाई तो दूर, जांच भी नहींंं हो रही।

जिले में 10 रेत खदाने हंै। सारे खदान चालू है। मेघा रेत खदान में पानी भर जाने के कारण यहां से निकासी नहीं हो रही है। खदानों की लिमिट बचाने नया तरकीब अपनाया जा रहा है। हाइवा वाहन में 14 घनमीटर रेत आता है, जबकि ट्रेक्टर में तीन घनमीटर सप्लायरों के पीटपास में बराबर इतना ही अंकित किया जाता है। लेकिन अपने पास रखे डुप्लीकेट पीटपास में घनमीटर कम कर दिया जाता है। अर्थात हाईवा की रवानगी होने पर डुप्लीकेट पीटपास में ट्रेक्टर का घनमीटर डाला जाता है।

दुर्ग, भिलाई से पहुंचने वाले वाहनों में अधिकतर ऐसा खेल हो रहा है। इससे घनमीटर कम आता है और खदान की लिमिट को भी पीटपास के हिसाब से मेंटेन कर लिया जाता है। यह खेल पिछले कई साल से यहां चल रहा है।

मुरूम, गिट्‌टी के लिए भी पीटपास नहीं दिया जा रहा

मिट्‌टीको छोड सभी प्रकार के खनिज में पीटपास लेना जरूरी है। जिले में रेत के साथ मुरूम, गिट्‌टी, ईंट सप्लाई में भी पीटपास नहीं दिया जा रहा। पीटपास नहीं देने से लाखों का राजस्व हानि हो रही है। सेटिंग में ही खनिज की सप्लाई हो रही है।

जेसीबीपर राेक नहीं

रेतखदानों में किसी सूरत पर जेसीबी से खुदाई नहीं करना है, लेकिन जिले में जेसीबी से ही खुदाई हो रही। खानापूर्ति के लिए बीच में एकाध कार्रवाई कर प्रशासन कुंडली मारकर बैठ जाता है। लीलर, जंवरगांव, तेंदूकोना, गाड़ाडीह, परखंदा, बुड़ेनी सहित प्राय: सभी खदानों में जेसीबी चल रही।

धमतरी. जिले के रेत खदानों में बेखौफ जेसीबी से खुदाई की जा रही है।