स्कूल के सामने राइस मिल, बच्चों के मध्याह्न भोजन में गिरती है डस्ट
ग्राम सोनपुर में स्थापित उसना राइस मिल यहां के निवासियों और उनके पालतू मवेशियों के लिए बीमारी और अकाल मौत का कारण बन गया है। गांव वालों का कहना है कि मिल का प्रदूषित पानी जलस्त्रोतों में मिल रहा है जिससे हैंडपंपों व नलों से गंदा पानी आ रहा है और इसके प्रदूषण की वजह से लोग पीलिया जैसी घातक बीमारी की चपेट में लगातार आने लगे हैं। 6 माह पूर्व इसी क्षेत्र में पीलिया से दूसरी कक्षा के एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है। राइस मिल के सामने प्राइमरी स्कूल है जहां मध्याह्न भोजन के दौरान मिल की राख व डस्ट भोजन में गिरती है। वहीं गंदे पानी की असहनीय दुर्गंध से बच्चों का पढ़ना मुश्किल हो रहा है।
यहां की प्रधान पाठक श्रीमती साहू का कहना है मिल की राख व दूषित पानी की दुर्गंध के अलावा मिल में रोज कई भारी वाहन आते जाते हैं, जिससे छोटे-छोटे बच्चों पर आवागमन के दौरान खतरा अलग बना रहता है। 10 से 12 टन लोड के कारण इन वाहनों से गांव की सड़क भी धंस गई है। पालतू मवेशी भी मिल के प्रदूषित अवशेष खाकर मौत के मुंह में समा रहे हैं। जहरीली होती हवा और राख की परत जमने के कारण खेती बाड़ी अलग चौपट हो रही है।
जोर पकड़ रही बंद करने की मांग : ग्रामवासियों का कहना है कि राइस मिल को ग्राम पंचायत ने अगस्त 2007 में एनओसी इस शर्त के साथ दी थी कि इससे निकले वाले प्रदूषित पानी को मिल की जमीन पर ही रोका जाएगा और प्रदूषण रोकने के सभी उपाय किए जाएंगे, लेकिन इसका पालन ही नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा मिल में गांव के लोगों को ही काम पर रखने की बात भी कही गई थी, लेकिन एक भी व्यक्ति को नहीं रखा गया है। इस मनमानी के कारण अब ग्रामवासी मिल को बंद करने की मांग कर रहे हैं।
कोई समस्या नहीं
गांववालों से कोई शिकायत नहीं मिली है। प्रदूषित पानी परिसर से बाहर नहीं जा रहा है। दो साल पहले गांववालों ने कुछ शिकायतें की थी, जिसका निराकरण उसी समय किया जा चुका है। फिलहाल किसी को कोई समस्या नहीं है, कुछ लोग झूठी शिकायतें कर रहे हैं। वेंकट रेड्डी, मालिक गीता लक्ष्मी राइस मिल
नहीं देना था एनओसी
मिल से धूल के कण उड़ते जरूर हैं, पर स्कूल के अंदर नहीं जाते, लेकिन गंदे पानी की बदबू जरूर आती है। धूल खेतों में ज्यादा दिखती है। बच्चे की मौत तबीयत खराब होने के कारण हुई थी। परेशानी हो रही है, तो मिल के लिए एनओसी ही नहीं दी जानी थी, ग्रामवासियों को उसी समय विरोध करना था। सीताराम छिदैइया, सरपंच कोड़ेबोड़
चारों तरफ राख की काली परत, दूषित पानी की सड़ांध
धमतरी। भारी प्रदूषण की वजह से राइस मिल को बंद कराने की मांग लगातार कर रहे हैं सोनपुरवासी।
फैल रही बीमारियां
गांव के निवासी कौशल गोस्वामी, केशवराम साहू, जगमोहन पात्रे, महेश कमलवंशी, धरमदास लहरे, मेहत्तर बांधे, भानसिंह साहू, पुरानिक साहू, हेमंत शर्मा, शत्रुघन बंजारे, संतोष पात्रे आदि ने बताया कि अब इस प्रदूषित माहौल में रहना उनकी नियति बन चुकी है, क्योंकि शिकायतों पर गौर करने की फुर्सत प्रशासन को नहीं मिल रही है। उन्होंने बताया कि मिल के प्रदूषित पानी और सड़े-गले अवशेष से गांव के सभी जलस्रोत प्रदूषित हो चुके हैं, जिससे लोग पीलिया समेत अन्य संक्रामक बीमारियों की चपेट में लगातार आ रहे हैं। पीलिया होने के कारण ही करीब 6 माह पहले रेखराम लहरे के 7 वर्षीय पुत्र इनेश कुमार की मौत हो चुकी है, वहीं दुखुराम साहू, सीताराम, किसानुराम, भगवानदास, जगमोहन दास, पुनीतराम, हेमलाल, समारूराम, मंगलदास, तिलकदास आदि के पालतू मवेशी भी मिल का प्रदूषित पदार्थ खाकर अपनी जान गंवा बैठे हैं।
ग्राम पंचायत कोड़ेबोड़ का आश्रित ग्राम सोनपुर की आबादी करीब 700 है। स्थिति का जायजा लेने जब भास्कर प्रतिनिधि इस गांव में पहुंचा, तब यहां के पेड़-पौधों, खेत-खलिहानों से लेकर हर तरफ, काली राख की परत जमी नजर आई और उसना प्लांट का सड़ांध मारता पानी मिल से बाहर खेतों से लेकर रिहायशी क्षेत्रों तक फैला दिखा। प्रदूषित हवा के कारण घुटन और आंखों में जलन व हवा में उड़ते धान के भूसे व राख के आंख में जाने का खतरा अलग महसूस हो रहा था।
धमतरी। ग्राम सोनपुर में राइस मिल परिसर के बाहर फैला प्रदूषित पानी।