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किसान मन मोबाइल बर टमड़उल होगे

7 वर्ष पहले
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नए नियम ने उलझाया

धमतरी। अछोटा सहकारी सोसायटी में पंजीयन कराने लगी कतार

सरकार के नए नियमों ने किसानों को उलझा कर रख दिया है। सन 2012 तक धान बेचे और पिछले साल नही बेचे ,उनका पंजीयन नहीं हो रहा। नए सदस्य को तहसील में पंजीयन कराना है। मोबाइल नंबर, ऋण पुस्तिका, वोटर आईडी, किसान क्रेडिट कार्ड पंजीयन के लिए अनिवार्य है।

जनदर्शनमें लगाई गुहार

गंगरेलबांध डूबान क्षेत्र के खाली जमीन को सिंचाई विभाग से लीज पर लेकर खेती करने वाले किसानों का पंजीयन नही हो रहा है। सोमवार को ग्राम मालगांव, बारगरी, कोड़ेगांव, किसनपुर, मोंगरागहन, अरौद डूबान के ग्रामीणों ने कलेक्टर के जनदर्शन में गुहार लगाई। किसानों ने कहा कि पिछले कई साल से उनका धान सोसायटियों में खरीदा गया, उसी तरह इस बार भी धान खरीदी किया जाए।

84 हजार किसानों में से 23 हजार 388 ही कर पाए हैं पंजीयन के लिए आवेदन, साफ्टवेयर में 5636 का हो पाया पंजीयन।

भास्करन्यूज |धमतरी

सरकारीधान खरीदी केंद्रो में धान बेचने के लिए पंजीयन कराने पहुंच रहे किसानों से मोबाइल नंबर मांगा जा रहा, अधिकांश बगले झांकते नजर रहे हैं। सोसायटियों में मशहूर छत्तीसगढ़ी गीत “टमड़उल होगे जी’ किसानों पर चरितार्थ होते दिख रहा है।

किसानों को धान बिक्री के लिए 1 से 30 सितंबर तक सोसायटियों में पंजीयन करा लेने कहा गया है। पखवाड़ा गुजर गया लेकिन 25 फीसदी किसान पंजीयन के लिए अर्जी नहीं दे पाए। पन्द्रह दिन का समय बाकी है।नए नियम किसानों को भारी पड़ रहा है।अछोटा सोसायटी में पहुंचे ग्राम जंवरगांव, शकरवारा, मथुरा, तेंदूकोना, मुड़पार, बरारी, कोटाभर्री, अछाेटा, भोयना के कई किसानों के पास मोबाइल नही है,लेकिन पंजीयन के लिए जरूरी होने पर वे रिश्तेदारों या पड़ोस के लोगों का मोबाइल नंबर मांग रहे हैं।किसान उत्तम ध्रुव, चतुरराम, गंगाराम, खेदूराम आदि ने बताया कि कई किसान अपने नाती, भांजा, बेटा या पड़ोसियों से नंबर मांगकर लाए हंै। एक मोबाइल एक ही खातेदार के लिए उपयोग में लाया जा सकता है, इस कारण किसान वर्ग के लोग दूसरे को अपना मोबाइल नंबर देने से कतरा रहे हैं।

जितनेखाते उतने मोबाईल

परिवारमंे पिता, प|ी, पुत्र, पुत्री या दादा-दादी के नाम पर अलग-अलग खेत है तो उस परिवार के सभी सदस्यों के लिए अलग-अलग मोबाइल जरूरी है। लिहाजा यह भी परेशानी का कारण बन गया है। किसी-किसी परिवार