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धान में पत्तीमोड़, कीट, पतंगों का बढ़ रहा प्रकोप

7 वर्ष पहले
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दवाविक्रेता की माने तो किसानों को फसलांे में बीमारियों की रोकथाम अच्छे उत्पादन के लिए 6 हजार रूपए खर्चा आता है। कुछ एक किसान ऐसे हंै जो बीमारी नहीं होने की दशा में बीमारियों की अटैक होने का आभाश से ही कीटनाशक दवाईयों का छिड़काव कर देते हंै।

धमतरी. धान फसल को बचाने किसानों को करना पड़ रहा कई बार दवा छिडकाव।

मौसम की दोहरी मार के बाद फसलों में बीमारियों को लेकर परेशान है कृषक, फसल बचाने भारी भरकम खर्चकर दवाईयों का करेंगे छिड़काव

भास्करन्यूज| धमतरी

अंचलके किसान अब धान के पौधों में हो रही बीमािरयों से परेशान है। धान के पौधों में अब तनाछेदक, चितरी, बंकी, फंगस, पत्ती मोड़ का प्रकोप दिखने लगा है। कीटनाशक दवाईयों की छिड़काव किए बगैर बीमारियों से निजात नही मिलेगी। कुछ जगहों में धान के पौधों में बालियां निकल आई है जहां भूरा माहो के प्रकोप से किसान परेशान हंै। समय रहते अगर उपचार नहीं किया गया तो रातोरात फसल चट हो जाएगी।

ग्राम बलियारा के किसान हिन्छाराम साहू, विनोद कुमार, भोजराम, पन्नालाल साहू आिद ने बताया कि मौसम की दगाबाजी के चलते धान की बुआई देर से हुई है। किसान अभी भी दोहरी मार झेल रहे हैं। अब कीट पतंगाें और बीमारियों की वजह से किसान परेशान हंै। भारी भरकम पैसा खर्च कर अब कीटनाशकों का छिड़काव किया जाएगा उससे भी फसल सुरक्षित रहे इसकी कोई गारंटी नहीं है। कोलियारी के कृषक छबिलाल सोनकर, रघु साहू, जगदीश निषाद सहित ग्राम करेठा, अमेठी, कलारतराई के दर्जनों किसानों ने बताया कि इस क्षेत्र के किसान सुविधा संपन्न हैं। सिचाई साधन होने के कारण जून- जुलाई में बोनी कार्य प्रारंभ कर दिए थे।

जिसके कारण उसके फसलों में बालियां गई है लेकिन फसलां में भूरा माहों और इल्लियांे का प्रकोप बढ़ गया है। फसलों को बचाने कीटनाशक दवाईयों का शीघ्र छिड़काव करेंगे।