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कैलेंडर बनाकर भूल गए, टेस्ट हो रहा संगाेष्ठी
गुणवत्ता वर्ष को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने शाला कैलेंडर बनवा की थी पहल। सरकारी स्कूलों में पढाई एवं अन्य गतिविधियां संचालित करने बनाई थी समय सारणी।
भास्करन्यूज |धमतरी
शिक्षागुणवत्ता वर्ष को लेकर डीईओ ने प्लानिंग कर बेहतर शिक्षा का ख्वाब देखा-दिखाया था। लेकिन तीन महीने में ही योजनाओं की हवा निकल गई। सिर्फ समय पर स्कूल खुलने और शिक्षकों का आना िनयंत्रित हो पाया। पर ही लगाम कंसा गया। अध्यापन और सतत मूल्यांकन जैसी योजनाअों का कहीं कोई अता-पता नही है।
जिला शिक्षा विभाग ने बड़ी जोर शाेर से सब पढंे सब बढें, स्कूल पढें बर जिनगी गढे बर जैसी नारो की थीम के साथ 2014-15 के लिए शाला कैलेंडर तैयार कराया। कैलेंडर में जून से अप्रैल तक की पढाई एवं अन्य शाला गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। पाठयन्तर गतिविधियों के साथ स्थानीय मासिक, त्रैमासिक अर्धवार्षिक, वार्षिक परीक्षा, मासिक अध्यापन संगोष्ठी, शाला प्रबंधन एवं विकास समिति की संगोष्ठी, त्रैमासिक पालक समिति की बैठकों की बकायदा तिथि निर्धारित की गई। स्कूलों को कैलेंडर बांट पालन करने का निर्देश भी दिया गया। लेकिन आज वे कैलेन्डर आलमीरा मे रखे हंै या हेड मास्टर के टेबल में कांच के नीचे दबे हैं,या दीवारों पर शो पीस बन कर रह गए है। कैलेंडर के अनुसार पढाई हो रही और ही अन्य गतिविधि। कुछ स्कूलों में तो कैलेंडर कचरे के ढेर की शोभा बढ़ा रहे है। ऐसे में डीईओ के शिक्षा गुणवत्ता अभियान को जोर का झटका लग रहा है। कैलेंडर तो जारी कर दिया गया लेकिन इस बात की काेई मानिटरिंग नही की जा रही है कि कैलेंडर का अनुपालन किया भी जा रहा है नही। कुछ शिक्षकों का कहना है कि इसकी कभी मानिटिरंग नही हुई। बमुश्किल शहर के एकाध स्कूल मे ही इसका पालन हो रहा है, शेष आज भी पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हंै।
जालमपुर प्राथमिक शाला में शालेय पीठासीन पंजी बनाकर नियमो का पालन किया जा रहा। यह पंजी सभी स्कूलों को बनाना है, और गतिविधियों को अपडेट करना है, कई स्कूलों के हेडमास्टर पंजी भी नही दिखा पाए। कुछ ने नियमों का पालन होने की बात कहीं, लेकिन ऐसा होते नही दिख रहा था। अनेक स्थानों पर शिक्षकों की कमी का बहाना बनाया जा रहा है।
नही हो रहा सतत मूल्यांकन
कैलेंडरके अनुसार हर माह शिक्षकों के बीच अध्यापक संगोष्ठी तथा छात्रों की पढाई का स्तर जांचने सतत मूल्याकंन परीक्षा लेना