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विनम्रता और प्रेम से ही अध्यात्म की शुरुआत
अर्जुनी में भागवत कथा का अायोजन, कथा सुनने बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रोता।
भास्करन्यूज |धमतरी
भगवानइस संसार के हर व्यक्ति में विद्यमान है। मनुष्य इस दुनिया की चकाचौंध में अपने मन की आवाज को अनसुना कर देता है। इसी कारण वह भगवान से दूरी भी बना रहा है। आदमी की विनम्रता प्रेम से ही अाध्यात्म की शुरुआत होती है। व्यक्ति के आचार-विचार ही उसके साथ चलते हैं और इन्हीं से अच्छा बुरा कार्य करता है। अच्छे बुरे कर्मों का फल इसी जन्म में मिलता है। उक्त बातंे राष्ट्रीय संत राजीव नयन ने कही।ग्राम अर्जुनी में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ कथा आयोजित है,जहां श्रोता कथा सुनने पहुंच रहे है। कथा वाचक ने कहा कि गौमाता में करोड़ो देवी-देवताओं का वास होता है। आज से कई साल पहले घर-घर में गाय पाली जाती थी, लेकिन आज वर्तमान युग में इसकी जगह कुत्तों ने ले लिया है। कुत्ते पालने का फैशन चल पड़ा है। लोग गौमाता की सेवा नहीं करना चाहते। कलिकाल में सत्य बोलना ही सबसे बड़ा तप है। सत्य परेशान हो सकता है पर पराजित नहीं। भागवत कथा व्यक्ति को सत्य का अनुगामी बनाती है।
श्रीमद् भागवत के मुख्य तीन वक्ता और तीन श्रोता हैं। इनमें प्रथम नारद-व्यास जो परोपकार प्रधान हैं। दूसरे सूत-शौनक यज्ञ प्रधान एवं तीसरे सुकदेव-परीक्षित कथा प्रधान हैै। कथा प्रधान श्रीमद भागवत को ही हम सब श्रवण कर रहे हैं। भगवान तो भक्तों के अधीन हैं। वे कभी किसी का बुरा नहीं करते, जो अपना हर कार्य प्रभु पर समर्पित करता है। प्रभु उसकी रक्षा स्वयं करते हैं। उन्हांेने राजा को बताया कि भागवत कथा सुनने मात्र से मनुष्य जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पहली बार राजा परीक्षित ने गंगा नदी के तट के किनारे सुकदेव मुनि से सुनी थी और राजा को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। मनुष्य को अहंकार त्यागकर विनम्रता से जीवन व्यतीत करना चाहिए।
कुमार्ग से कमाया धन कालाधन
िसर्री|ग्रामसिर्री में आयोजित भागवत महापुराण में प्रवचन कर्ता पं प्रमोद शास्त्री ने कहा कि गलत ढंग से कमाया हुआ धन ही काला धन है। इसमें कलयुग निवास करता है। सदमार्ग में चलने वाले महापुरूष कभी भी मनुष्य को कुमार्ग में चलने की प्रेरणा नहीं देते। लालच में मनुष्य अपना सब कुछ गवां देता है। पांडव भी लालच में पड़कर अपना सब कुछ गवां बैठे। व्यसनमुक्त जीवन ही सच्चा जीवन है