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मृदा परीक्षण में पीछे विभाग, नहीं मिल रहे किसान

5 वर्ष पहले
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जिले में कृषि विभाग को मिट्‌टी परीक्षण के लिए किसान नहीं मिल रहे है या यू कहे कि मिट्‌टी परीक्षण के लिए स्वयं किसान सामने नहीं आ रहे है। विभाग को हर साल 10 हजार से अधिक नमूने की जांच करने का लक्ष्य मिलता है। किसानों की जागरुकता के अभाव में वे लक्ष्य पूरे नहीं हो पाते।

इस बार विभाग ने लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश में जुटा है। मिटटी परीक्षण की सुविधा जिले में नहीं होने से उन्हें धमतरी प्रयोग शाला के भरोसे रहना पड़ रहा है। जनवरी की स्थिति में विभाग ने 10 हजार 13 नमूने लिए है। जिसमे 9491 धमतरी प्रयोग शाला भेजे गए। धमतरी से जांच के बाद 1897 नमूने का रिपोर्ट आया।

जिले में 11 हजार किसानों को हेल्थ कार्ड जारी करने का लक्ष्य रखा है वहीं सिर्फ 1783 किसानों को मृदा हेल्थ कार्ड जारी किया गया है।

बालोद मंडी में खुलेगी प्रयोगशाला: धमतरी की जगह बालोद में ही जांचने के लिए शासन ने तैयारी भी शुरू की है। कृषि उपज मंडी में ही इस प्रयोग शाला को खोला जाएगा। इसके बाद किसानों व विभाग को राहत मिल सकती है।

जरूरी है सभी पोषक तत्व
मृदा पोषक तत्वों का भंडार है। जो पौधों को सीधे खड़ा रहने के लिए सहारा देती है। पौधों को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जिसमे मुख्य तत्व कार्बन, हाइड्रोजन, आक्सीजन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटास , कैल्सिशयम, मैग्नीशियम है। सूक्ष्म तत्व जस्ता, मैग्नीज, तांबा, लौह, बोरोन, मोलिबडेनम व क्लोरीन है। इन सभी तत्वों का संतुलित मात्रा में प्रयोग करने से ही उपयुक्त पैदावार ली जा सकती है।

बालोद। जिले में मिट्‌टी परीक्षण के लिए दिया गया नमूना।

कृषि विभाग
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