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पहले लालच में रोका धान, अब उचित दाम नहीं

5 वर्ष पहले
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भाव बढ़ने की उम्मीद में किसानों ने धान रोककर रखा, लेकिन अब कृषि उपज मंडी में धान का वाजिब दाम नहीं मिलने से किसानों को निराश होना पड़ रहा है। मंडी में प्रतिदिन दो से ढाई हजार क्विंटल धान की आवक हो रही है।

श्यामतराई स्थित कृषि उपज मंडी में प्रतिदिन आस-पास के गांवों के अलावा दूर-दराज के किसान धान बेचने के लिए पहुंच रहे हैं। रबी फसल की धान को अधिकांश किसानों ने मंडी में बेचकर अधिक लाभ के लिए कोठी में रोक कर रखा था। ग्राम खरेंगा से धान बेचने पहुंचे किसान राममिलन, कृपाराम रजक, बंजारी के दयानंद साहू ने बताया कि ग्रीष्मकालीन फसल के लिए रुपए की जरूरत है। ऐसे में धान बेचना जरूरी है, लेकिन मंडी में उचित रेट नहीं मिल रहा है। 2 महीने पहले अच्छा भाव था। फागुनदाह के गोपालराम ने कहा कि मंडी में धान का रेट गिर गया है। कम रेट मिलने के बावजूद यहां धान बेचना मजबूरी है।

अब हो रहे निराश
किसानों की माने तो 2014-15 में शांभा धान का रेट अच्छा था। उन्हें प्रति क्विंटल 15 से 16 सौ तक रेट मिला। अधिकांश किसान दाम बढ़ने की उम्मीद में धान को रोक रखे थे, लेकिन उन्हें निराश होना पड़ा। कृषि उपज मंडी में एक से डेढ़ हजार क्विंटल धान की आवक रोज हो रही है। आईआर 64 का रेट प्रति क्विंटल 1250 से 1270 रुपए चल रहा है। इसी तरह शांभा का भाव 1460 रुपए प्रति क्विंटल है।

क्वालिटी पर रेट
बताया जाता है कि धान की क्वालिटी देखकर मिलर्स रेट दे रहे हैं। धान की क्वालिटी अच्छी नहीं होने के कारण रेट भी गिरता जा रहा है। ऐसे में किसानों को परेशानी हो रही है। कहा जा रहा है कि पखवाड़ेभर पूर्व धान को अच्छा भाव मिला था, लेकिन अब भाव में गिरावट होने से किसान मायूस हो रहे हैं।

नुकसान
धमतरी। मंडी में प्रतिदिन पहुंच रहा दो से ढाई हजार क्विंटल धान।

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