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गाड़ियों से उड़ता हुआ भूसा आंखों के लिए बना खतरा

5 वर्ष पहले
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बिना सुरक्षा व्यवस्था के वाहनों में भूसा, पैराकुटी की सप्लाई हो रही है। सड़कों में भूसा उड़ाते वाहन निकल रहे हैं, जो लोगों के आंखों को कमजोर कर रही है। कई ने अपनी आंखों की रौशनी तक गवां डाली।

धमतरी शहर धूल-धक्कड़ का शहर बन गया है। शहर के मुख्य मार्गों के अलावा नेशनल हाईवे भी अब लोगों के लिए सुरक्षित नहीं रहा। धूल के बारीक कण, भूसा आदि सड़कों में जमे रहते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी शहर से जुड़े सड़कों में हो रही है।

बिना सुरक्षा व्यवस्था के वाहनों के कोयले का बुरादा, भूसा, पैराकुटी, रेत आदि ढोया जा रहा है। वाहन के पीछे चलने वाले लोग बरसों से इस समस्या से त्रस्त हैं। गाड़ियां भूसा उड़ाते सड़कों पर फर्राटे से दौड़ रही है। उड़कर यही भूसा लोगों की आंखें फोड़ रहा है। समस्याग्रस्त लोग आंख रगड़ते डाक्टरों के पास ईलाज कराने पहुंच रहे हैं।

नहीं होती कार्रवाई: भारी मात्रा में भूसा ले जाने वाले अनेक मालवाहक वाहन फर्राटे से सड़कों पर दौड़ रहे हैं और ट्रैफिक पुलिस ऐसे वाहन मालिकों को कार्रवाई तो दूर, समझाइश भी नहीं देते। ट्रैफिक पुलिस ऐसे वाहनों को रोकती जरूर है, लेकिन दूसरे दिन फिर वहीं वाहन सड़क पर आफत छोड़ते मिलते हैं। रोड क्लीनर नपा के गैरेज में धूल खा रही है। दिखावे के लिए 6-7 महीने में एकाध बार सड़क पर दिखाई देती है। सड़कों की नियमित सफाई होगी, तो काफी राहत मिलेगी।

जा सकती है आंखों की रोशनी भी
आंख में कचरा घुसने की समस्या को लेकर रोजाना 15-20 लोग प्रभावित हो रहे हैं। शहर के डाक्टरों के पास रोजाना लगभग 20 मरीज कचरा निकलवाने पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. जेएस खालसा ने बताया कि उनके पास रोजाना 2 से 3 लोग शिकायत लेकर पहुंचते हैं। शहर के अन्य अस्पतालों में भी लोग इस समस्या को लेकर प्रतिदिन जाते हैं, पानी निकलने लगता है। रगड़ने से आंख लाल हो जाती है, पानी निकलने लगता है। रगड़ने से आंख खराब भी हो सकती है।

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