भुला दिए गए जंगल सत्याग्रह के प्रणेता
25 सितंबर को थी पुण्यतिथि, गृहग्राम बेन्द्रानवागांव स्थित प्रतिमा सम्मान को तरसती रही।
भास्करन्यूज |धमतरी
जिलेके सेनानियों, शहीदों को उनकी जयन्ती पुण्यतिथि पर भी सम्मान नहीं मिल रहा। महापुरूष का दर्जा मिला, प्रतिमा स्थापित कर दी गई और फिर पलट कर नहीं देखा। 25 सितंबर को ऐसी ही अनदेखी सामने आई। छग के बड़े सत्याग्रहों में से एक जंगल सत्याग्रह के प्रणेता अमर शहीद मींधूराम कुंभकार की प्रतिमा सम्मान को तरस गई।
शहीद की पुण्यतिथि पर जिला प्रशासन गांव स्तर पर कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। गृहग्राम बेंद्रानवागांव में स्व. मींधूराम की प्रतिमा 2007 में लगाई गई। कुछ साल कार्यक्रम हुए इसके बाद प्रतिमा पर फूल चढ़ाने भी कोई नहीं पहंुचा। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस सहित प्रमुख अवसरों पर उन्हे याद कर वीरता देशप्रेम का बखान किया जाता है। विडंबना है कि ऐसे महान व्यक्ति को उसके पुण्यतिथि पर भी याद नहीं किया गया। गांव में कई लोगों को पुण्यतिथि की जानकारी नहीं है। ग्रामीणों ने कहा कि जयंती, पुण्यतिथि पर कुछ साल से आयोजन नहीं हो रहा है। 15 अगस्त, 26 जनवरी को ही माला पहनाकर औपचारिकता पूरी की जाती है।
रिसर्च टीम पहंुची
छगके शहीदाें पर पूर्व विधायक चुन्नीलाल साहू रिसर्च कर रहे हैं। गुरूवार को वे इसी सिलसिले में बेंद्रानवागांव पहुंचे थे। उनके साथ साहू समाज के जिलाध्यक्ष दयाराम साहू, पूर्व अध्यक्ष चितरंजन साहू भी आए थे, जिन्होने फूल माला पहना श्रध्दांजलि अर्पित की थी।
खरपतवारसे अटा स्थल
बेंद्रानवागांवके स्कूल चौक में प्रतिमा स्थापित कर गार्डनिंग की गई है। स्थल के चारों ओर खरपतवार उग गए आई है। सालों से दीवार, प्रतिमा की पेंटिग धुलाई, सफाई आदि नहीं हुई है।
धमतरी. रूद्री नवागांव में स्थापित शहीद मींधू कुम्हार की प्रतिमा।