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जब तक मन में है काम-क्रोध मनुष्य को नहीं मिलता मोक्ष

6 वर्ष पहले
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मिशनमैदान में आयोजित गौ कथामृत के तीसरे दिन पं. राजेन्द्र दास देवाचार्य ने बताया कि काम वासनाओं से मानव मात्र कैसे मुक्त हो सकता है। जब तक काम, क्रोध, मद, लोभ के वशीभूत रहोगे, मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती। वासनाओं को नष्ट करना आवश्यक है। स्पप्न में भी सुख की प्राप्ति नहीं होगी। काम का फल मोक्ष नहीं है। मुक्ति के लिए वासनाओं, कामनाओं का नष्ट होना जरूरी है। गौ माता पर धर्म नहीं करने से मनुष्य पाप का अिधकारी होता है।

पंडितजी ने आगे बताया कि पूर्व जन्म में हमारी कामनाएं शेष रह जाती है इसलिए मनुष्य को जन्म-मृत्यु के बंधन से छुटकारा नहीं मिलता। चुंकि मरते समय कामनाएं अधूरी रह जाती है। इसलिए पुन: जन्म लेना पड़ता है। उन्होंने कथा क्षेपक के माध्यम से जन्म-मृत्यु के बंधन को विस्तार से समझाया। बिना भगवान कृष्ण भी प्रसन्न नहीं होते। गाय के बिना गोविंद की पूजा नहीं हो सकती।

इस मौके पर दीपक लखोटिया, लखमशी भानुशाली, बिहारीलाल अग्रवाल, रूपेश राजपूत, दिलीप बड़जात्या, अजय जैन, राधेश्याम शर्मा, भूषण सेठिया, संदीप पांडे, सरिता दोषी, मदन मोहन खंडेलवाल, सत्यभामा ठाकुर, भावना राठी, सुनीता भट्टड़ आदि उपस्थित थे।

धमतरी. रविवार को कथा वाचक राजेन्द्र दास देवाचार्य ने गौ पर दिया व्याख्यान।

सबको करनी चाहिए गाय की सेवा

उन्होंनेगौपालन के बारे में बताया कि कुछ लोग गायों की सेवा व्यापार करने के लिए करते हैं। बूढ़ी हो जाने पर गाय को कत्लखाना भिजवा देते हंै। यह कुमार्ग है गाय की सच्ची सेवा नहीं है। गाय की सच्ची सेवा करने से ही मोक्ष की प्राप्ति होगी। जब तक हमारी बुद्धि में यह बात बनी रहेगी कि गाय एक पशु है। तब तक ठीक से सेवा नहीं बन पाएगी।